18 July, 2018

जन शिकायतों के बोझ से कराह रही है मोदी सरकार

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नई दिल्ली। इस वर्ष जनता की ओर से सरकार को मिली शिकायतों का आंकड़ा 14 लाख को पार कर गया है। पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 12 लाख और 2015 में 8.8 लाख थी। 2017 का आंकड़ा 2013 या 2014 में यूपीए की पिछली सरकार के दौरान मिली लगभग दो लाख शिकायतों का सात गुना है। हालांकि, सरकार का कहना है कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा बढ़ोतरी का कारण सरकार की ओर से शिकायतों का तुरंत जवाब दिया जाना है और एक शिकायत के निपटारे के लिए लगने वाला औसत समय भी कम किया जा रहा है। हालांकि शिकायतों की बढ़ती संख्या को लेकर सरकार के शीर्ष स्तरों पर चिंता बनी हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 14 महीनों में अपनी मासिक प्रगति समीक्षा बैठकों में कम से कम आठ बार शिकायतों की संख्या कम करने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा था कि मूल कारणों को समाप्त करने के लिए व्यवस्था में सुधार करने चाहिए जिससे लोगों को शिकायत करने की जरूरत ही न पड़े। उन्होंने इस तरह का पहला निर्देश अक्टूबर 2016 में हुई एक समीक्षा बैठक में लेबर मिनिस्ट्री को शिकायतें कम करने के लिए सिस्टम में बदलाव करने को कहा था।

इससे एक महीना पहले उन्होंने सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) को बताया था कि जनता की ओर से शिकायतों की संख्या बढ़ रही है और इन्हें एक तय समयसीमा में सुलझाया जाना चाहिए। इस वर्ष मोदी शिकायतों की बढ़ती संख्या को लेकर पहले से अधिक सख्त हुए हैं। उन्होंने अप्रैल में रेलवे मिनिस्ट्री से शिकायतों की संख्या घटाने के साथ ही नियमों और प्रक्रियाओं में उपयुक्त बदलाव कर शिकायतों को रोकने के लिए कहा था। उन्होंने मई, जुलाई, अगस्त और नवंबर की प्रगति बैठकों में इसी तरह की सलाह उन डिपार्टमेंट को दी थी जिनके लिए सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल थे।

एक शिकायत के निपटारे का औसत समय काफी कम होने और 99 पर्सेंट शिकायतों का निर्धारित समय में निपटारा होने के बावजूद शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसा नहीं है कि जन शिकायतों को सिस्टम में बदलाव के लिए कम करने के लिए रूपरेखा मौजूद नहीं है। क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सरकार के कहने पर उन 40 डिपार्टमेंट की स्टडी की थी जिनकी सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं। क्यूसीआई ने शिकायतों के मूल कारणों की पहचान करने के साथ ही शिकायतों की संख्या कम करने के लिए सरकार को सिस्टम में बदलाव करने से संबंधित सुझाव दिए गए थे।

rgautamlko@gmail.com

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