14 December, 2018

मोदी सरकार ने यूएन में रुकवाया आंबेडकर की 127वीं जयंती कार्यक्रम को!

Modi government, 127th anniversary of B.R.Ambedkar, United nation, Dileep Mhaske, Foundation for Human horizon
एनडीएस ब्यूरो
लखनऊ। मोदी सरकार की दलित विरोधी नीतियों के चलते विश्व में सिम्बल ऑफ नॉलेज के प्रतीक भारत रत्न बाबा साहब डा. भीमराव रामजी ऑबेडकर की 127वीं जयंती इस बार अमेरिका में यूनाइटेड नेशन में धूमधाम से नहीं, बल्कि औपचारिकता निभाने के लिए मनाई जाएगी। अमेरिकन एनजीओ फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होराइजन के संस्थापक को भारतीय राजदूत द्वारा दी गई धमकी से मामला गरमा गया है। इससे देश और विदेश के बाबा साहब के करोड़ों अनुयायियों को तगड़ा झटका लगा है। इसको लेकर मोदी सरकार के खिलाफ दलितों में जबरदस्त रोष है।
बताते चले कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक दलित समुदाय से हैं। महाराष्ट्र में गरीब दलित परिवार में जन्मे दिलीप महासे  का जीवन संघर्ष काफी प्रेरणादायी है। कूड़ा बीन कर अपनी अजीविका चलाने वाले महासे बचपन से काफी कुशाग्र बुद्घि के थे। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए। बाबा साहब के अनुयायी दिलीप महासे ने बाबा साहब के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होराइजन का एक एनजीओ का गठन किया। इसी के जरिए आईआईटी और हार्वड के पूर्व छात्र तथा शोधकर्ता दिलीप महासे के भगीरथी प्रयासों से बीते दो वर्षों से फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होराइजन और अंतर्राष्ट्रीय आयोग के प्रयासों से बाबा साहब की जयंती धूमधाम से यूनाइटेड नेशन के मुख्यहाल में मनाई जा रही थी। लेकिन मोदी सरकार के अडंगेबाजी के कारण यूनाइटेड नेशन ने 14 अप्रैल 2018 को होने वाला कार्यक्रम निरस्त कर दिया था। फाउंडेशन फॉर ह्यूमन  होराइजन के संस्थापक दिलीप महासे ने टेलीफोनिक वार्ता में कहा कि बीते दो वर्षों से बाबा साहब की जयंती मनाने के लिए भारत सरकार सहयोग कर रही थी। लेकिन भारत सरकार के कुछ अफसरों ने उच्च स्तर पर दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि इस बार यूनाइटेड नेशन में कार्यक्रम करने से मना कर दिया गया है। इस वजह से यूनाइटेड नेशन ने आगामी 14 अप्रैल को यूनाइटेड नेशन के मुख्यहाल में होने वाले कार्यक्रम को निरस्त कर दिया है। उन्होंने अमेरिका में भारतीय राजदूत सैय्यद अकबरूद्दीन पर धमकी दिए जाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने बताया कि इस सूचना के बाद से देश और विदेश में बाबा साहब के करोड़ों अनुयायी काफी आक्रोशित हैं। यह यक्ष प्रश्न है कि भारत सरकार ने आखिर यूएन में मनाए जाने वाले कार्यक्रम को रुकवाने के पीछे क्या मंशा है, नहीं जान सका। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय से कई बार सम्पर्क किया। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब चारों तरफ से भारत सरकार पर दबाव पड़ा तो सरकार ने औपचारिकता निभाने के लिए यूनाइटेड नेशन के एक छोटे हाल में कार्यक्रम आयोजित करने को बात कही है।
श्री महासे ने कहा कि भारत सरकार के इस कदम से दलित समुदाय को बहुत ही दुख पहुंचा है। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत समेत कई देशों से अतिथि आ रहे थे। जिन्होंने अपना वीजा और टिकट पर काफी पैसा खर्च किया। मोदी सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बातें दलित हितों की करते हैं, लेकिन वास्तविकता उलट है। इस संबंध में पीएमओ से कई बार सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

 

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