22 February, 2018

कभी नहीं थकते यूपी के ‘जुगाड़बाज’ आईएएस

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राजेन्द्र के. गौतम
लखनऊ। प्रदेश के खिलाडिय़ों को यूपी के ‘जुगाड़बाज आईएएसÓ अफसरों से अधिक स्टेमना हासिल करने की ट्रेनिंग लेनी चाहिए। ये जुगाड़बाज आईएएस अफसर कभी नहीं थकते हैं। सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, लेकिन रिटायरमेंट के पहले और बाद भी किसी न किसी महत्वपूर्ण कुर्सी को हासिल कर लेते हैं। चाहे योगी सरकार हो या फिर मायावती और अखिलेश यादव सरकार रही हो, सभी टायर्ड और रिटायर्ड आईएएस अफसरों को उपकृत करने में पीछे नहीं रहते हैं। टायर्ड और रिटायर आईएएस हर सरकार में कार्यकर्ता बनने का इनाम सेवानिवृत या वीआरएस लेनेे के बाद मिलता है। इनाम भी ऐसा-वैसा नहीं बल्कि नीली से लाल बत्ती में आ जाते है। कोई भी सरकार हो अपने चहेते और वफादार अफसरों को उपकृत करने में पीछे नहीं रहती।
उल्लेखनीय है कि रिटायर्ड आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किए जाने के अपने निर्णयों को सरकारें यह कहकर तर्क देती है कि प्रशासनिक क्षमता और दक्षता का लाभ उठाने के लिए अफसरों की सेवाएं ली जाती है। कोई भी सरकार हो यह कहने की स्थिति में नहीं है कि उसने किसी टायर्ड या रिटायर्ड को उपकृत नहीं किया है। यूपी में ऐसे आईएएस अफसरों की लम्बी फेहरिस्त है।
पूर्ववर्ती मायावती सरकार में मुख्य सचिव रहे शंभूनाथ को हिन्दी संस्थान का उपाध्यक्ष बनाया गया था। प्रमुख सचिव पद से रिटायर हुए राजेन्द्र भौनवाल को राज्य निर्वाचन आयुक्त बनाया गया था। इसी तरह मायावती सरकारों में मलाईदारों पोस्टों पर रहे श्रीकृष्ण को रिटायर होने के बाद उन्हें राज्य लोकसेवा अधिकरण का उपाध्यक्ष (प्रशासनिक) पद पर तैनाती दी गई थी।  मायावती सरकार में ही एस.आर. लाखा को पहले लोक सेवा आयोग अध्यक्ष फिर महामाया प्राविधिक विश्वविद्यालय का कुलपति का अध्यक्ष बनाया गया। मायावती सरकार में ही मुख्यसचिव रहे अतुल कुमार गुप्ता क ो वित्त आयोग अध्यक्ष बनाया गया। प्रमुख सचिव पद से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने वाले कपिल देव स्थानीय निकाय पालिका बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त पद से सेवानिवृत हुए अनीस अंसारी को कांशीराम अरबी फारसी विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया।
पूर्व अखिलेश यादव सरकार ने प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और राजस्व परिषद के अध्यक्ष जावेद उस्मानी की मुख्य सूचना आयुक्त पद पर तैनाती देकर उपकृत किया है। इससे पहले अखिलेश यादव सरकार ने पूर्व नौकरशाह सतीश अग्रवाल को राज्य निर्वाचन आयुक्त में तैनाती दी है। पूर्व मुख्य सचिव नवीन चंद्र वाजपेयी को राज्य योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाने के साथ ही राज्य मंत्री का दर्जा भी प्रदान किया है। पीसीएस से आईएएस रहे तपेन्द्र प्रसाद ने वीआरएस लेकर सपा पार्टी को ज्वाइन किया। सपा सरकार ने तपेन्द्र प्रसाद को प्रशासनिक सुधार विभाग में सलाहकार नियुक्त किया था। साथ ही पार्टी में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। पूर्व दिवंगत नौकरशाह करनैल सिंह को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था। देश दीपक वर्मा को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का अध्यक्ष बनवाया है। चतुर्थ वित्त आयोग के अध्यक्ष पद पर रिटायर्ड आईएएस आनंद मिश्र को तैनात किया।
योगी सरकार में रिटायर्ड आईएएस रोहित नंदन को राज्य लोकसेवा अधिकरण, जी.बी. पटनायक को जल निगम का अध्यक्ष, वृंदा स्वरूप को वेतन समिति का अध्यक्ष, रिटायर्ड आईपीएस शैलजाकांत को मथुरा बोर्ड का अध्यक्ष और ईमानदार छवि के वरिष्ठï आईएएस मनोज कुमार को राज्य निर्वाचन आयोग का आयुक्त बनाया गया है। मायावती सरकार ने ही रिटायर्ड आईएएस रामकुमार को राज्य सूचना आयुक्त बनाने का प्रयास किया था लेकिन राज्यपाल ने इस पर असहमति जताती दी थी उसके बाद उन्हें पुलिस सुधार आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। मायावती से पूर्व की सरकारों में रिटायर्ड आईएएस मलाई काटने में पीछे नहीं रहे।
मुख्यसचिव रहे वी.के. मित्तल जहां बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए  गए थे। पूर्व मुख्य सचिव भोलानाथ तिवारी को वित्त सलाहकार परामर्शदात्री समिति के चेयरमैन बनाए गया। मुख्य सचिव रहे योगेन्द्र नारायण को जहां राज्यसभा में महासचिव बनने का मौका मिला तो यूपी कैडर के ही आईएएस वजाहत उल्ला सेवा निवृत होने के बाद पहले केन्द्रीय मुख्य सूचना आयुक्त बने। ट्राई के चेयरमैन रहे नृपेन्द्र मिश्र अब मोदी सरकार ने फिर अपना प्रमुख सचिव बनाया है। अफसरों को महिमा मंडित करने की प्रवृति हर सरकार की रही। मायावती ने पिछले कार्यकाल में ही शशांक शेखर सिंह को एडजस्ट करने के लिए न सिर्फ प्रदेश में पहली बार मंत्रिमंडलीय सचिव का पद क्रियेट ंह के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रमुख सचिव पद से सेवानिवृत हुए एस.डी. बागला को एससीएसटी कमीशन का चेयरमैन बनाया गया था।
बीते कुछ सालों में भारी संख्या में यूपी में आईएएस रिटायर हुए हैं, जो अब किसी न किसी आयोग में अपनी सेवाएं देने के लिए प्रयासरत हैं। मौजूदा समय रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) और राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के लिए जबरदस्त मारा-मारी है। रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रकाश सिंह,कृषि उत्पादन आयुक्त और अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह ने भी अध्यक्ष के लिए आवेदन किया है। एक साल रिटायरमेंंट का बाकी है। इसके लाभ को देखते हुए राज प्रताप सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए आवेदन किया है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा ने तो अध्यक्ष व सदस्य दोनों के लिए आवेदन किया है।
पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी आवेदन किया है। अन्य अफसरों में अरुण कुमार मिश्र, आराधना जौहरी, बालकृष्ण मिश्र, जोगिन्दर पाल शर्मा, किशन सिंह अटोरिया, डॉ प्रभात कुमार, सेवारत राज प्रताप सिंह, राकेश गर्ग, रंग नाथ मिश्र प्रमुख सचिव न्याय, रोहित नन्दन, राजेन्द्र मोहन श्रीवास्तव, संतोष कुमार द्विवेदी, डॉ. सूर्य प्रताप सिंह, शंकर अग्रवाल, वीरेश कुमार, राजीव मिश्र रिटायर महाप्रबंधक रेलवे, ने अध्यक्ष पद के लिए आवेदन किया है।  सदस्य पद के लिए मणि प्रसाद मिश्र, शिव शंकर सिंह, एसपी सिंह, आराधना जौहरी, रोहित नन्दन, शैलेन्द्र चौधरी, राकेश गर्ग, प्रवीण कुमार सिंह, किशन सिंह अटोरिया, शशिकान्त पाण्डेय न्यायिक सेवा, सुशील चन्द्र गुप्ता रिटायर डीआईजी स्टाम्प, विजय बहादुर सिंह, अरुण कुमार सिन्हा, वीरेश कुमार, बालकृष्ण मिश्र, जोगिन्दर पाल शर्मा, राजेन्द्र मोहन श्रीवास्तव, भानु प्रताप सिंह, रविन्द्र दत्त पालीवाल पीसीएस तथा सूर्य प्रकाश मिश्र ने रेरा का सदस्य बनने के लिए आवेदन किया है।  रेरा अध्यक्ष के लिए कुल 28 लोगों ने आवेदन किया है। इसमें सबसे ज्यादा रिटायर आईएएस अफसर हैं। इसके अलावा राज्य विद्युत नियामक आयोग के लिए वरिष्ठï आईएएस देवेन्द्र चौधरी ने भी आवेदन किया है।

 

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