19 October, 2018

मोदी सरकार की तरह नई नई ऊंचाईयां छू रही है महंगाई

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नई दिल्ली। आर्थिक मोर्चे पर सरकार के लिए चुनौती बरकरार है। खुदरा महंगाई दर धीरे-धीरे सिर उठाने लगी है जबकि औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती कायम है। हाल यह है कि नवंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.88 प्रतिशत हो गयी है जो कि पंद्रह माह के उच्चतम स्तर पर है। दूसरी ओर औद्योगिक गतिविधियों का बैरोमीटर माने जाने वाले आइआइपी की दर अक्टूबर में घटकर मात्र 2.2 प्रतिशत रह गई।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में खुदरा महंगाई में उछाल आने की वजह ईंधन, सब्जियों और अंडों के भाव में तेजी आना है। खुदरा महंगाई इस साल अक्टूबर में 3.58 प्रतिशत जबकि पिछले साल नवंबर में 3.63 प्रतिशत थी। इससे पहले खुदरा महंगाई का उच्च स्तर अगस्त 2016 में 5.05 प्रतिशत था। खुदरा महंगाई में वृद्धि का यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रिजर्व बैंक इसी के आधार पर अपनी मौद्रिक नीति की दशा और दिशा तय करता है। अपनी मौद्रिक नीति की पिछली समीक्षा में रिजर्व बैंक ने महंगाई में वृद्धि की आशंका जतायी थी। यही वजह है कि आरबीआइ ने ब्याज दरों में कटौती से परहेज किया।

आरबीआइ ने खुदरा महंगाई दर चार प्रतिशत पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा है हालांकि यह दो प्रतिशत कम या ज्यादा भी हो सकती है। नवंबर में सबसे ज्यादा 22 फीसद महंगाई सब्जियों में रही है जबकि अक्टूबर में यह 7.47 प्रतिशत थी। इसी तरह प्रोटीनयुक्त उत्पादों जैसे अंडे की कीमतें 7.95 प्रतिशत बढ़ गई हैं जबकि इससे पूर्व माह में यह 0.69 प्रतिशत थी। इसी तरह ईंधन श्रेणी के उत्पादों में भी 7.92 प्रतिशत की महंगाई वृद्धि हुई है। हालांकि दालों की कीमतों में कमी आई है। कुल मिलाकर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर नवंबर में 4.42 प्रतिशत रही जबकि अक्टूबर में यह 1.9 प्रतिशत थी।

rgautamlko@gmail.com

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