17 October, 2018

काम नहीं, कारनामें बोल रहे हैं चंचल और महेश के

काम नहीं, कारनामें बोल रहे हैं चंचल और महेश के
  • पंचायती राज विभाग में खूब हो रहा है खेल

त्रिनाथ के. शर्मा
लखनऊ। हम नहीं सुधरेंगे की तर्ज पर प्रमुख सचिव पंचायतीराज की कार्यप्रणाली है। अपनी इसी कार्यप्रणाली के चलते यूपीएसआईडीसी में हुए भ्रष्टïाचार की जांच सीबीआई में फंसे हुए हैं। इसके बावजूद अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव में नहीं ला पा रहे हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त से लेकर प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग तक पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं।
पंचायती राज विभाग फिर प्रमुख सचिव चंचल तिवारी की कार्य प्रणाली को लेकर चर्चा में है। बताते चलें कि नियमों को ताक पर रखकर सेवाप्रदाता कम्पनियों के जरिए खुला खेला फरूर्खाबादी चल रहा है। रामा इन्फोटेक, हर्ष इन्फोटेक, राज इन्ड्रस्टियल सिक्योरिटी, ई वीजन इम्प्लीमेन्टेशन, गुजरात इन्फोटेक, श्रीट्रान इण्डिया, आईटीवल्र्ड, सनवालिया आरएसई  सेवाप्रदाता कम्पनियों द्वारा बेरोजगारों से चौकीदार की पोस्ट के लिए एक लाख, कम्प्यूटर ऑपरेटर के लिए डेढ़ लाख, लेखाकार और जेई सिविल दो लाख वसूले जा रहे हैं। 26 फरवरी 2016 को पंचायवती राज विभाग के प्रमख सचिव चंचल कुमार तिवारी ने शासनादेश संख्या 569/33.3/2015, 279/2014 द्वारा पंचायत सहायकों का मानदेय दस हजार रूपया सभी कर एवं शुल्कों सहित निर्धारित किया था।
साथ में आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन के लिए जिला स्तरीय कमेटी के माध्यम से चयन हेतु प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। लेकिन इस प्रक्रिया संशोधित कर दिया था। लेकिन यह संशोधन बड़ा खेल करने के लिए किया गया था। प्रदेश की ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आवंटित धन 3861.60 करोड़ रुपए के लूट की स्क्रिप्ट बहुत ही खूबसूरती से तैयार की गई है। इसके लिए जहां नियमों को ताक पर रखकर खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) के अधिकारों का हनन किया गया है वहीं पंचायती राज विभाग के सहायक विकास अधिकारियों को प्रभावशाली बनाया गया है। जिससे ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आवंटित धन में व्यापक पैमाने पर बंदरबांट की जा सके।
पंचायती राज विभाग के सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठï आईएएस और प्रमुख सचिव चंचल कुमार तिवारी अपने कई निर्णयों को लेकर विवादों में रहते हैं। नियमों के खिलवाड़ के पीछे ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आवंटित धन 3861.60 करोड़ रुपए में बंदरबांट की मंशा है। इसको लेकर प्रांतीय विकास सेवा अफसरों का एक प्रतिनिधि मण्डल ने शासन स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। लेकिन अभी तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हो पाई है। प्रमुख सचिव पंयाचतीराज चंचल तिवारी का कहना है कि आरोप तमाम लगते हैं। लेकिन उनके कार्य सौ फीसदी नियम कानून के तहत होते हैं। इस वजह से आरोपों की कोई परवाह नहीं है।
सचिवालय प्रशासन विभाग की साख हुई कमजोर
मायावती सरकार में सरकार में आबकारी आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। शराब व्यवसाय में एक गु्रप का एक छत्र  राज्य स्थापित करने के लिए ऐसी आबकारी नीति बनाई, जिससे सरकार को कम और उस ग्रुप को अधिक फायदा हुआ। अखिलेश यादव सरकार में आईएएस महेश गुप्ता को प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास के साथ लखनऊ के कमिश्नर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी इसी वजह से दी गई थी। नोएडा में एसईजेड को लेकर कुछ शर्तों को तय करने को लेकर उन्होंने एक आदेश कर दिया था। कुछ बड़े कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने आदेश में कुछ नई शर्तें जोड़ दी गईं, जिसके लिए उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार को भरोसे में नहीं लिया था।  इसी वजह से अखिलेश यादव सरकार ने प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास के साथ लखनऊ के कमिश्नर के पद से हटा दिया था। लखनऊ मण्डलायुक्त के पद पर तैनाती के दौरान गोमती नगर स्थित सहारा शहर के विवादित नक्शे को पास कर दिया था।
अपनी प्रवृत्ति के अनुरूप दिव्यांग कल्याण विभाग में खेल शुरू कर दिया है। इसकी छींटे योगी सरकार पर पडऩे लगी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शकुंतला मिश्रा दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति की अनियमितताओं को लेकर जांच के आदेश दिए थे। जांच में की कमान विभाग के प्रमुख सचिव महेश गुप्ता को सौंपी गई। जांच रिपोर्ट में काफी लीपापोती की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर योगी सरकार ने कुलपति को पद से हटा दिया। लेकिन लचर जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति को कोर्ट से राहत मिल गई। इस मामले में योगी सरकार की काफी किरकिरी हुई। सचिवालय प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी आईएएस महेश गुप्ता को मिलने के बाद से इस विभाग के कारनामों इन दिनों सुर्खियों में हैं। अधिकतर भ्रष्टïाचार के आरोपी बाबू के संरक्षणदाता बनकर उभरे हैं। सचिवालय प्रशासन विभाग में स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नौकरशाही पर बारीक नजर रखने वाले वरिष्ठï पत्रकार ए.पी. दीवान का कहना है कि महेश गुप्ता जिन विभागों में रहे हैं, वे विभाग भ्रष्टïाचार के रूप में काफी कुख्यात हुए हैं। इसके बावजूद हर सरकार में महत्वपूर्ण पद पाने में सफल हो जाते हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

 

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