25 March, 2019

सीबीआई के रडार पर अफसर और पत्रकार

शिशुपाल सिंह 

लखनऊ। पहले भर्ती घोटाला और अब एलईडी वैन घोटाले से सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग सुर्खियों में है। एलईडी घोटाले की जांच शुरू होने से कई अधिकारी और पत्रकार सीबीआई के रडार पर हैं। इससे जहां एलईडी घोटाले के आरोपी अफसरों और पत्रकारों में हड़कम्प मचा हुआ है वहीं सत्ता के गलियारों में खूब चर्चा है।

बताते चले कि सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में पहले भर्ती घोटाला हुआ था। इस भर्ती घोटाले में विभाग के कई अफसरों को जेल जाना पड़ा था और कुछ आईएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की सिफारिश की गई थी। लेकिन मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण सिर्फ छोटे अफसरों पर ही कार्रवाई हो पाई थी। अब पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में 65 करोड़ रुपए के एलईडी वैन घोटाले का मामला प्रकाश में आया था। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के कुछ अफसरों और कुछ पत्रकारों की मिलीभगत से यह घपला हुआ था। शिकायत पर योगी सरकार ने इस प्रकरण की जांच कराई थी। जांच में यह तथ्य प्रकाश में आए थे कि एलईडी संचालन में भारी अनियमितताएं हुई हैं। बताया जाता है कि अनियमितताओं का यह हाल रहा है कि एलईडी वैन का भुगतान स्कूटर के नम्बर पर हो गया। जांच में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अफसर अमजद हुसैन मुख्य आरोपी पाए गए थे। इस प्रकरण में योगी सरकार ने अमजद हुसैन को निलम्बित कर दिया था।

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। 14 जनवरी 2019 को सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अफसर अमजद हुसैन को सीबीआई की विशेष न्याय कोर्ट गाजियाबाद में तलब किया गया है। ईडी 25 डायमंड निवासी और वरिष्ठï पत्रकार ए.एम. खान ने इस बात की पुष्टिï करते हुए बताया कि 31 जनवरी को दिन दो बजे सीबीआई के कुछ अफसर आए थे। वे अमजद हुसैन को पूछ रहे थे। पड़ोसी होने के नाते पूछा तो उन अफसरों ने नोटिस सर्व करने की बात कही।

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सूत्रों का कहना है कि एलईडी वैन घोटाले में विभाग के कई आला अफसर और पत्रकारों के फंसने की काफी संभावना है। कुछ पत्रकारों ने एलईडी वैन के नाम पर खूब खेल किया। इस प्रकरण पर अधिकतर जिम्मेदारों ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से साफ मना कर दिया।

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