15 August, 2018

बिजली चोरी रोकने का जिम्मा डीएम पर

एनडीएस ब्यूरो

लखनऊ। प्रदेश में बिजली चोरी रोकने के लिए ऊजाज़् विभाग स्थानीय जिला प्रशासन की मदद से छह महीने तक बिजली चोरों के खिलाफ अभियान चलाएगा। इसकी शुरुआत शुक्रवार से कर दी गई। हर जिले में चलने वाले अभियान का नेतृत्व डीएम खुद करेंगे। इसके लिए मुख्य सचिव राजीव कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निदेज़्श जारी कर दिए हैं। इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस और प्रवज़्तन दल की संयुक्त टीमें हिस्सा लेंगी। यह पहला मौका है, जब बिजली चोरी रोकने की सीधी जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को दी गई है।
बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाने के लिए एनजीज़् ऑडिट के आधार पर उन इलाकों को चुना जाएगा, जहां बिजली ज्यादा सप्लाई हो रही है, लेकिन राजस्व वसूली कम है। ऐसे अभियानों के लिए महीने की शुरुआत में ही रूपरेखा तैयार करने के निदेज़्श मुख्य सचिव ने दिए हैं। जो संवेदनशील जगहें हैं, वहां पर जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ मैजिस्ट्रेट की भी तैनाती किए जाने के निदेज़्श मुख्य सचिव ने दिए हैं। अभियान चलाए जाने की एक बड़ी वजह उदय समझौते के मुताबिक लाइन लॉस कम करने में नाकाम होना भी है। उदय योजना के तहत 2017-18 में लाइन लॉस 23 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया था, मगर ऊजाज़् विभाग 2017-18 में इसे 32 प्रतिशत से घटाकर 27 प्रतिशत तक ही ला सका है। लाइन लॉस में कमी लक्ष्य के मुताबिक न कम होने की वजह से भी बिजली वितरण कंपनियों के कजज़् लेने की सीमा कम हो गई है। इसके अलावा भारत सरकार से मिलने वाली कई वित्तीय सुविधाओं पर भी रोक लग सकती है। बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाने के लिए आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध करवाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों से राजस्व बढ़ाने के लिए कनेक्शन काटने और बिल संशोधन कर बकाया वसूलने का अभियान चलाया जाएगा। बिजली विभाग में अलग-अलग काम के लिए रखे गए कंसल्टेंट्स के काम की जांच होगी। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की आपत्ति के बाद ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कंसल्टेंट की जवाबदेही तय करने के लिए उचित कदम उठाया जाएगा। ऊर्जा विभाग में पावर फॉर ऑल, उदय, सौभाग्य, टैरिफ, आईटी और विद्युतीकरण योजना के लिए कंसल्टेंट रखे गए हैं। इन प्रॉजेक्ट की लागत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। कंसल्टेंट को भारी-भरकम भुगतान होने के कारण इन्हें दी जाने वाली रकम उपभोक्ताओं के टैरिफ ऑर्डर में भी जोड़ी जाती है। इसकी वजह से भी बिजली महंगी होती है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इन सभी मुद्दों को लेकर शुक्रवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मुलाकात की। उन्होंने ऊर्जा मंत्री से कंसल्टेंट की तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञता की जांच की भी मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कंसल्टेंट बिजली विभाग के आंकड़ों को लेकर ही रिपोर्ट बना लेते हैं। यही वजह है कि बिजली कंपनियां लगातार घाटे में चल रही हैं।

grish1985@gmail.com

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