18 July, 2018

देश से ज्यादा नौकरी प्यारी, मोदी को पनगढ़िया का झटका

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लखनऊ। नीति आयोग के उपाध्यक्ष को देश से ज्यादा अपनी नौकरी प्यारी है। यही वजह है कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अरविंद पनगढिय़ा ने उपाध्यक्ष पद को छोडऩे की घोषणा कर दी। इससे मोदी सरकार और पनगढिय़ा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिस व्यक्ति को अपने देश से ज्यादा नौकरी प्यारी रही हो, उसने देश की दशा-दिशा तय करने वाली आर्थिक नीतियों किस तरह से बंटाधार किया होगा।

बताते चलें कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने नीति आयोग से इस्तीफा देने की घोषणा की है। इस बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें 31 अगस्त से सेवाओं से मुक्त करने का आग्रह किया है। पनगढ़िया की मानें तो कोलंबिया विविद्यालय उनके अवकाश को बढ़ाने को तैयार नहीं है। लेकिन उनका एक माह पहले इस्तीफा देने की घोषणा करना और मंत्रिमंडल विस्तार में वित्त मंत्रालय सौंपे जाने की र्चचाओं के बीच उनके इस्तीफे में पेंच दिखाई देता है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बाद पनगढ़िया दूसरा बड़ा नाम है जो भारत में एक शीर्ष पद को छोड़कर अमेरिका में अध्यापन के पेशे में लौट रहा है। पनगढ़िया ने एक महीना पहले इस्तीफा देकर कुछ सवाल खड़े किए हैं। र्चचाओं का बाजार गर्म है कि इस बहाने दवाब बनाने की रणनीति भी हो सकती है। क्योंकि मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होना है। उन्हें वित्तमंत्री बनाने की जाने का बाजार भी गरम है। नीति आयोग के गलियारों में यह भी र्चचा है कि पनगढ़िया और आयोग के सीईओ अमिताभ कांत में पट नहीं रही थी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु को नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है।

भारतीय अमेरिकी मूल के अर्थशास्त्री और कोलंबिया विविद्यालय में भारतीय राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पनगढ़िया नीति आयोग के जनवरी, 2015 में पहले उपाध्यक्ष बने थे। उस समय योजना आयोग का समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया था। नीति आयोग से पहले योजना आयोग में आमतौर पर परंपरा थी कि उपाध्यक्ष का पद प्रधानमंत्री के साथ-साथ चलता है। प्रधानमंत्री आयोग के आध्यक्ष होते हैं।पनगढ़िया ने कहा कि कोलंबिया विविद्यालय उन्हें अवकाश का विस्तार देने को तैयार नहीं है। ऐसे में वह 31 अगस्त को नीति आयोग से निकल जाएंगे। करीब दो महीने पहले उन्होंने पीएम से 31 अगस्त तक नीति आयोग के कार्यभार से मुक्त करने का आग्रह किया था।

rgautamlko@gmail.com

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