27 May, 2018

भारतीय नर्सों ने दुनियाभर में नाम कमाया : राष्ट्रपति

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारतीय नर्सों ने दुनिया भर में अपने लिए सम्मान अर्जित किया है। कई देशों की स्वास्थ्य-सेवाओं में खासकर खाड़ी के देशों में भारतीय नर्सें बड़ी संख्या में सेवारत हैं। उनकी कुशल सेवाओं और अनुशासित कार्य-शैली से उन्हें लोगों का स्नेह और सराहना प्राप्त हुई है।
श्री कोविंद ने शनिवार को राष्ट्रपति भवन में फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के मौके पर मनाते हुए असाधारण सेवाओं के लिए 35 नर्सिंग कर्मियों को ‘फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’ से सम्मानित किया। फ्लोंरेंस नाइटिंगेल ने नर्सिंग को मानव-सेवा के सम्मानित कार्य के रूप में स्थापित किया था। उन्होंने कहा कि आज जिन नर्सिंग कर्मियों को पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, वे भारत की विविधता में एकता को दर्शाते हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से लेकर दमन और दीव तक तथा हिमाचल प्रदेश से लेकर केरल तक नर्सिंग कर्मियों ने ये पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
उन्होंने कहा कि देश को स्वस्थ रखने में नर्सिंग की सेवा प्रदान करने वाले आप सभी लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आपने निष्ठा और समर्पण के साथ नर्सिंग के माध्यम से देश की सेवा की है। यह देश आप सभी नर्सिंग कर्मियों के प्रति आभारी है|
श्री कोविंद ने कहा कि इस समय भारत में प्रति एक हजार की आबादी पर 1.7 नर्सें हैं जबकि विश्व का औसत 2.5 नर्सों का है। पिछले कुछ वर्षों में नर्सिंग शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों की संख्या बढ़ी है। परिणामस्वरूप मार्च, 2017 तक पंजीकृत नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य-कर्मियों की संख्या बढ़कर 27 लाख से अधिक हो गई है। लेकिन यह संख्या भी कम पड़ जाती है क्योंकि नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य सेवियों की जरूरत उपचारात्मक स्वास्थ्य देखभाल (क्यूरेटिव हेल्थकेयर) से आगे निवारक (प्रिवेन्टिव) और प्रचारक स्वास्थ्य देखभाल (प्रमोशनल हेल्थकेयर) में भी बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि विकसित देशों में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। उनकी देख-भाल के लिए प्रशिक्षित नर्सों की मांग भी बढ़ रही है। भारत एक युवा देश है। युवाओं को रोजगार की जरूरत है। देश-विदेश में नर्सों की बढ़ती मांग को देखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले वर्षों में नर्सिंग शिक्षा पर बहुत काम किया है। नवम्बर, 2017 तक देश के लगभग नौ हजार संस्थानों की प्रवेश क्षमता प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख बीस हजार नर्सिंग प्रशिक्षुओं की हो गई है। 

grish1985@gmail.com

Review overview
NO COMMENTS

POST A COMMENT