18 April, 2019

राफेल : आने से पहले ही CAG रिपोर्ट खारिज की कांग्रेस ने

  • सिब्बल ने कहा, सौदे के वक्त वित्त सचिव रहे महर्षि, सीएजी की रिपोर्ट की कोई विश्वसनीयता नहीं, रिपोर्ट में सिर्फ सरकार को बचाने के सिवाय कुछ नहीं होगा
  • सिब्बल से सवालजब सिब्बल से सवाल किया गया कि सुप्रीम कोर्ट में सीएजी रिपोर्ट का विषय आया था, तो कांग्रेस ने ही तो कहा था कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, तो इस पर पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने जेपीसी की मांग की थी, ताकि राफेल सौदे की ठीक से जांच हो सके।
  • संप्रग सरकार में रहे मंत्री शासन की अज्ञानता से ग्रस्त केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के जवाब में कहा कि संप्रग सरकार में दस साल मंत्री रहे लोग शासन की अज्ञानता से ग्रस्त हैं। जेटली ने ट्वीट करके कहा, उन्हें यह तक नहीं पता कि वित्त सचिव केवल एक पदनाम भर है, जो वित्त मंत्रालय में सबसे वरिष्ठ सचिव को दिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सचिव (आर्थिक मामले) का रक्षा मंत्रालय की व्यय संबंधी फाइलों के बारे में कोई भूमिका नहीं होती है।

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि राफेल पर सीएजी की रिपोर्ट की कोई विश्वसनीयता नहीं है, क्योंकि इसमें सिर्फ सरकार को बचाने के सिवाय कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि संसद में सोमवार को इस रिपोर्ट को रखा जाना संभावित है। इस रिपोर्ट की सच्चाई पर संदेह इसलिए है, क्योंकि सीएजी राजीव महर्षि राफेल सौदे के वक्त वित्त सचिव होते थे। वह पूरे सौदे में टीम का हिस्से थे, इसलिए उनसे निष्पक्ष रिपोर्ट की उम्मीद नहीं है।

कांग्रेस ने रविवार को सीएजी के यहां एक ज्ञापन भिजवाकर अपनी आपत्ति दर्ज भी कराई। सिब्बल ने बताया कि इससे पहले भी दो बार कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल सीएजी के समक्ष अपनी बात रख चुका है। सीएजी जिस रिपोर्ट को संसद में रखने वाले हैं, वह हितों के टकराव का स्पष्ट मामला है। इसके साथ-साथ रिपोर्ट के जरिए वह प्रधानमंत्री के प्रति वफादारी दिखाने की पूरी कोशिश भी करेंगे। वरिष्ठ नेता ने कहा कि क्या सीएजी अपने खिलाफ जांच करेगी या उनसे यह उम्मीद की जा सकती है कि क्या वह राफेल में सरकार के खिलाफ जांच करेंगे। सिब्बल ने बताया कि राजीव महर्षि 24 अक्टूबर 2014 से 30 अगस्त 2015 तक वित्त सचिव रहे और इसी दौरान प्रधानमंत्री ने पेरिस में 10 अप्रैल 2015 में इस सौदे की घोषणा की। इससे साफ है कि यह सौदा राजीव महर्षि की देखरेख में हुआ, तो ऐसे में उनसे कैसे अपेक्षा की जा सकती है कि वह इसमें हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच करेंगे?

rgautamlko@gmail.com

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