20 July, 2018

छह माह के भीतर स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा के लिए विशेष दिशानिर्देश और समग्र नीति तैयार करें

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को निर्देश जारी किया कि वह छह महीने के अंदर देशभर के स्कूलों में छात्रों की सुऱक्षा के लिए विशेष दिशानिर्देश और समग्र नीति तैयार करे। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने ये आदेश जारी किया। याचिका गुरुग्राम के रेयान स्कूल के छात्र के पिता बरुण ठाकुर और सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकीलों ने दायर की थी।

पिछली सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों ने कहा था कि वे भी बच्चों की सुरक्षा के लिए गाइडलाइन देना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से एक अर्जी दाखिल कर कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान राज्यों के स्कूलों में कई घटनाएं हुई है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कठोर गाइड लाइन बनाये। तब निजी स्कूलों के संगठनों ने कहा कि वे भी इस मामले पर गाइड लाइन देना चाहते हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि यह एक गंभीर मुद्दा है और इस पर ध्यान देने की जरुरत है। पिछले 4 अप्रैल को जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर दिया था। उसके पहले भी 4 दिसंबर 2017 को इस मामले की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एएम खानविलकर ने अपने को अलग कर लिया था।

याचिका सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करनेवाली दो महिला वकीलों आभा शर्मा और संगीता भारती ने दायर की है। याचिका में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षासुनिश्चित करने और ऐसा न करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की मांग की गई है।

याचिका में इन वकीलों ने मांग की है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए जो वर्तमान में सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं उन्हें लागू किया जाए। उनके साथ ही स्कूल प्रबंधनों की भी जिम्मेदारी तय की जाए। जैसे ही बच्चे स्कूल बसों या वाहनों से स्कूलों में पहुंचते हैं उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं। मृत छात्र प्रद्युम्न के पिता ने सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने सीबीआई जांच, परिवार की सुरक्षा, सभी स्कूली छात्रों की सुरक्षा और स्कूल अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग की है।

grish1985@gmail.com

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