20 April, 2018

रोमांटिक हीरो के रूप में हमेशा याद रहेंगे शशि कपूर 

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  • अनूठा है नैनीताल, शशि और अमिताभ का त्रिकोण

मुंबई। बॉलीवुड में शशि कपूर का नाम एक ऐसे अभिनेता के तौर पर शुमार किया जायेगा जिन्होंने अपने रोमांटिक अभिनय के जरिये लगभग तीन दशक तक सिने प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया। 18 मार्च, 1938 को जन्मे शशि कपूर का मूल नाम बलबीर राज कपूर था, का रुझान बचपन से ही फिल्मों की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे। उनके पिता पृवीराज कपूर और भाई राजकपूर और शम्मी कपूर फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता थे। उनके पिता यदि चाहते तो वह उन्हें लेकर फिल्म का निर्माण कर सकते थे लेकिन उनका मानना था कि शशि कपूर संघर्ष करें और अपनी मेहनत से अभिनेता बनें।

Shashi Kapoor, romantic hero, amitab bachchanशुरुआत बाल कलाकार के रूप में की 

शशि कपूर ने अपने सिने करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की। चालीस के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया। इनमें 1948 में प्रदर्शित फिल्म ‘‘आग’ और 1951 में प्रदर्शित फिल्म ‘‘आवारा’ शामिल है जिसमें उन्होंने अभिनेता राजकपूर के बचपन की भूमिका निभाई ।अपने पिता के थियेटर से जुड़े, बाद में

जेनिफर केडिल से शादी की

पचास के दशक में शशि कपूर अपने पिता के थियेटर से जुड़ गये। इसी दौरान भारत और पूर्वी एशिया की यात्रा पर आई Shashi Kapoor, romantic hero, amitab bachchanबर्तानवी नाटक मंडली शेक्सपियेराना से वह जुड़ गये जहां उनकी मुलाकात मंडली के संचालक की पुत्री जेनिफर केडिल से हुयी। वह उनसे प्यार कर बैठे और बाद में उनसे शादी कर ली।

अभिनेता के रूप में वर्ष 1961 से शुरुआत की 

शशिकपूर ने अभिनेता के रूप में सिने करियर की शुरुआत वर्ष 1961 में यश चोपड़ा की फिल्म ‘‘धर्म पुत्र’ से की। इसके बाद उन्हें विमल राय की फिल्म ‘‘प्रेम पत्र’ में भी काम करने का अवसर मिला लेकिन दुर्भाग्य से दोनों ही फिल्में टिकट खिड़की पर असफल साबित हुयी।

1965 में अहम सिने करियर साबित हुआ

इसके बाद शशि कपूर ने ‘‘मेंहदी लगी मेरे हाथ’, ‘‘होली डे इन बांबे’ और ‘‘बेनेजीर’ जैसी फिल्मों में भी काम किया लेकिन ये फिल्में भी टिकट खिड़की पर बुरी तरह नकार दी गयी। वर्ष 1965 शशि कपूर के सिने करियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी ‘‘जब जब फूल खिले’ प्रदर्शित हुयी। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की जबर्दस्त कामयाबी ने शशि कपूर को भी ‘‘स्टार’ के रूप में स्थापित कर दिया। वर्ष 1965 में शशि कपूर के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म फिल्म ‘‘वक्त’ प्रदर्शित हुयी। इस फिल्म में उनके सामने बलराज साहनी, राजकुमार और सुनील दत्त जैसे नामी सितारे थे। इसके बावजूद वह अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।

1965 से 1976 के बीच रोमांटिक हीरो की छवि

इन फिल्मों की सफलता के बाद शशि कपूर की छवि रोमांटिक हीरो की बन गयी और निर्माता-निर्देशकों ने अधिकतर फिल्मों में उनकी रूमानी छवि को भुनाया। वर्ष 1965 से 1976 के बीच कामयाबी के सुनहरे दौर में शशि कपूर ने जिन फिल्मों में काम किया, उनमें अधिकतर फिल्में हिट साबित हुयी।फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा : अस्सी के दशक में शशि कपूर ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और ‘‘जूनून’ फिल्म का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने ‘‘कलयुग’, ‘‘36 चैरंगी लेन’, ‘‘विजेता’, ‘‘उत्सव’ आदि फिल्मों का भी निर्माण किया। हालांकि ये फिल्म टिकट खिड़की पर ज्यादा सफल नहीं हुयी लेकिन इन फिल्मों को समीक्षकों ने काफी पसंद किया। वर्ष 1991 में अपने मित्र अमिताभ बच्चन को लेकर उन्होंने अपनी महात्वाकांक्षी फिल्म ‘‘अजूबा’ का निर्माण और निर्देशन किया लेकिन कमजोर पटकथा के अभाव में फिल्म टिकट खिड़की पर नाकामयाब साबित हुयी हालांकि यह फिल्म बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुयी।

शशि फिल्मी पर्दे पर शर्मिला टैगोर और नंदा के साथ काफी पसंद किए गए 

शशि कपूर के सिने करियर में उनकी जोड़ी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और नंदा के साथ काफी पसंद की गयी। इन सबके बीच शशि कपूर ने अपनी जोड़ी सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के साथ भी बनायी और सफल रहे। यह जोड़ी सर्वप्रथम फिल्म ‘‘दीवार’ में एक साथ दिखाई दी। बाद में इस जोड़ी ने ‘‘इमान धर्म’, ‘‘त्रिशूल’, ‘‘शान’, ‘‘कभी कभी’, ‘‘रोटी कपड़ाShashi Kapoor, romantic hero, amitab bachchan और मकान’, ‘‘सुहाग’, ‘‘सिलसिला’, ‘‘नमक हलाल’, ‘‘काला पत्थर’ और ‘‘अकेला’ में भी काम किया और दर्शकों का मनोरंजन किया।’जिन्ना‘‘ उनके सिने करियर की आखिरी फिल्म थी : नब्बे के दशक में स्वास्य खराब रहने के कारण शशि कपूर ने फिल्मों में काम करना लगभग बंद कर दिया। वर्ष 1998 में प्रदर्शित फिल्म ‘‘जिन्ना’ उनके सिने करियर की अंतिम फिल्म है जिसमें उन्होंने सूत्रधार की भूमिका निभाई। शशि कपूर ने लगभग 200 फिल्मों में काम किया है। शशि कपूर को फिल्म इंडस्ट्री के सर्वोच्च सम्मान ‘‘दादा साहब फाल्के’ से भी नवाजा गया था।

शशि कपूर और अमिताभ के बीच प्रेम का अनूठा त्रिकोण : जी हां, नैनीताल सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के बीच प्रेम का अनूठा त्रिकोण है, और इस त्रिकोण का अमिताभ और शशि कपूर के अलावा किसी को भी पता हो। नैनीताल, अमिताभ और शशि कपूर के इस त्रिकोण की कहानी अमिताभ के एक छात्र के रूप में नैनीताल के ‘‘शेरवुड कॉलेज’ से पढ़ाई के दौरान अभिनय की दुनिया में उतरकर जीवन का पहला पुरस्कार ग्रहण करने से शुरू होती है और इसी कहानी के अगले भाग में अपने शुरुआती दिनों में एक फिल्म में ‘‘एक्स्ट्रा’ के रूप में कार्य कर रहे अमिताभ को शशि कपूर का साथ मिलता है और फिर वे जल्दी ही शशि के साथ ‘‘दीवार’ फिल्म में ‘‘मेरे पास मां है..’ वाला सीन करते हैं। यह ‘‘दोस्ती’, ‘‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘‘कभी कभी’, ‘‘त्रिशूल’, ‘‘नमक हलाल’ और ‘‘सिलसिला’ सहित आदि फिल्मों से आगे बढ़ती हुई इतनी गहराती जाती है कि शशि जब अपने प्रोडक्शन में पहली फिल्म ‘‘अजूबा’ बनाते हैं तो उसमें अमिताभ ही प्रमुख भूमिका में होते हैं।

यही नहीं अमिताभ की बेटी ेता की शादी शशि के ही परिवार में, उनके बड़े भाई राज कपूर के पोते से होती है। इस बीच नैनीताल जरूर इस कहानी से दूर होता है, किंतु इन दोनों की पहली फिल्म ‘‘दीवार’ का वही ‘‘मेरे पास मां है..’ वाला सीन नैनीताल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘‘स्वच्छ भारत अभियान’ की जागरूकता के लिए लगाया जाता है और प्रधानमंत्री मोदी के ट्विटर हैंडल तक पहुंचता हुआ नैनीताल पूरी दुनिया में छा जाता है।

Shashi Kapoor, romantic hero, amitab bachchanअमिताभ ने नैनीताल के ‘‘शेरवुड कॉलेज’ में पढ़ने के दौरान ही अभिनय की दुनिया में पहला कदम ‘‘ज्योफ्री कैंडल’ के थियेटर ग्रुप ‘‘शेक्सपियराना’ के जरिए रखा था। उन्होंने शेरवुड में अभिनय के लिए ‘‘केंडल कप’ रखा था। इस ग्रुप में ज्योफ्री की बड़ी बेटी जेनिफर कैंडल भी शामिल थीं, जिन्होंने बाद में शशि कपूर से विवाह किया। यानी ज्योफ्री कैंडल बाद में शशि कपूर के श्वसुर बने। ज्योफ्री कैंडल के साथ काम करते हुए ही अमिताभ को ‘‘शेरवुड कॉलेज’ में अपने दूसरे वर्ष में महान रूसी नाटककार निकोलाई गोगोल के नाटक ‘‘इंस्पेक्टर जनरल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ‘‘केंडल कप’ मिला था। 

जब अमिताभ मुंबई में संघर्ष रहे थे, उन्होंने केवल 500 रुपयों के लिए ‘‘सात हिंदुस्तानी’ फिल्म में ‘‘एक्स्ट्रा’ कलाकार के रूप में ऐसा सीन किया था, जिसे फिल्म में दिखाया ही नहीं गया। ऐसे ही एक अन्य फिल्म में अमिताभ ने शशि कपूर की एक फिल्म में ‘‘एक्स्ट्रा’ के रूप में कार्य किया था, जिसमें शशि के जनाजे के साथ अमिताभ मातम मनाते हुए कुछ पलों के लिए दिखे थे। इस दौरान ही शशि ने अमिताभ से कहा था कि वे ‘‘एक्स्ट्रा’ कलाकार नहीं कुछ बड़ा करने के लिए बने हैं। स्वयं अमिताभ ने अपने एक ब्लॉग में इन घटनाओं के सिलसिले को शशि कपूर के साथ फिल्म दीवार के एक पुल के नीचे फिल्माए गए ‘‘मेरे पास मां है.’ वाले बहुचर्चित सीन के साथ जोड़ते हुए बताया कि इस दौरान शशि ने उन्हें अहसास नहीं होने दिया कि उनकी फिल्म का एक ‘‘एक्स्ट्रा’ कलाकार आज उनके साथ मुख्य भूमिका में है। अमिताभ, शशि और नैनीताल से शुरू हुई यह कहानी वापस नैनीताल पिछले वर्ष ‘‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत नैनीताल नगर पालिका द्वारा लगाए गए पोस्टर से पहुंची। 

rgautamlko@gmail.com

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