22 January, 2019

आरक्षण मैच जिताने वाला छक्का

  • नौकरियां कम तो आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सामान्य वर्ग के लोगों को आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सरकार पर हड़बड़ी दिखाने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जब सरकारी क्षेत्र में नौकरियां ही बहुत कम सृजित हो रही हैं, तो ऐसे में इस आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा? उन्होंने कहा कि इसे प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने राज्यसभा में संविधान (124वां संशोधन) विधेयक पर र्चचा में हिस्सा लेते हुए कहा कि जिस तरह से यह विधेयक लाया गया और पारित किया जा रहा है, उससे वह दुखी हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार को क्या जल्दी है? उन्होंने इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने का सुझाव दिया।

ओबीसी को मिले 54 फीसद आरक्षण

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी नेता राम गोपाल यादव ने बुधवार को अन्य पिछड़ा वर्ग को 54 फीसद आरक्षण देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय की गई आरक्षण की अधिकतम 50 फीसद सीमा को तोड़कर इसका रास्ता साफ कर दिया है। सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा संस्थानों में सवर्णो को 10 फीसद आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि ओबीसी को यह कहते हुए उनकी आबादी के अनुपात में आधा आरक्षण दिया गया था कि आरक्षण की अधिकतम 50 फीसद की सीमा को तोड़ा नहीं जा सकता।

छक्का नहीं पार कर पाएगा बाउंड्री

नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को लेकर बुधवार को राज्यसभा में कुछ दिलचस्प दावे सुनने को मिले। सरकार ने जहां इसे मैच जिताने वाला छक्का बताया, वहीं बसपा ने दावा किया कि यह छक्का सीमा पार नहीं जा पाएगा। बाद में र्चचा में भाग लेते हुए बसपा नेता सतीशचन्द्र मिश्रा ने कहा कि कानून मंत्री प्रसाद ने इसे मैच जिताने वाला छक्का बताया था। किंतु यह छक्का बाउंड्री (सीमा) भी नहीं पार कर पाएगा।

  • आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा संविधान में नहीं लगाई गई है
  • मौलिक अधिकार में बदलाव करने का अधिकार संसद कोआरक्षण देने के लिए राज्यों से संपर्क करने की जरूरत नहीं है

दिल्ली। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को मैच जिताने वाला छक्का बताते हुए बुधवार को कहा कि अभी इस मैच में विकास से जुड़े और भी छक्के देखने को मिलेंगे। सामान्य वर्ग को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण देने संबंधी संविधान 124वें संशोधन विधेयक पर बुधवार को राज्यसभा में र्चचा में हिस्सा लेते हुए प्रसाद ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सरकार ने यह साहसिक फैसला समाज के सभी वगरें को विकास की मुख्य धारा में समान रूप से शामिल करने के लिए किया है। सरकार पर अपने वादों को पूरा नहीं करने के विपक्ष के आरोप पर प्रसाद ने कहा कि मैच जिताने वाला यह पहला छक्का नहीं है, अभी ऐसे और भी छक्के लगेंगे।

उन्होंने इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में नहीं टिक पाने की विपक्ष की आशंकाओं को निमरूल बताते हुए कहा कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा संविधान में नहीं लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह सीमा सिर्फ पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति एवं जनजाति समूहों के लिए तय की है। संविधान के मौलिक ढांचे से छेड़छाड़ के आरोप पर प्रसाद ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 368 संसद को मौलिक अधिकार सहित संविधान के किसी भी भाग में किसी भी प्रकार का बदलाव करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन के बाद केन्द्र में ही नहीं, बल्कि राज्यों को भी इसका लाभ देना होगा और इसके लिए तय मानकों में समय-समय पर बदलाव करने का अधिकार राज्यों के पास होगा। उन्होंने कहा कि इस संविधान संशोधन विधेयक में मौलिक अधिकार से जुड़े अनुच्छेद 15 में एक उपधारा और 16 में भी एक उपधारा जोड़ी गई है। इसके संशोधन के बावजूद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और आर्थिक रूप से कमजारे वगरें के लिए 10 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण होगा। प्रसाद ने कहा कि इस संशोधन के माध्यम से मौलिक अधिकार में बदलाव किया जा रहा है। इसलिए आरक्षण देने के लिए राज्यों से संपर्क करने की जरूरत नहीं है। कई सदस्यों द्वारा बार-बार यह कहे जाने पर कि इसके जरिये संविधान की मूल ढांचा को बदला जा रहा है, इस पर कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान के बुनियादी ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

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