20 November, 2017

कृषि विभाग में ‘एएएस’ मशीन की खरीद में हुआ खेल !

शिशुपाल सिंह

लखनऊ। न हल्दी लगे, न फिटकरी, फिर भी रंग चोखा यह कहावत यूपी के कृषि विभाग के अफसरों पर सटीक साबित होती है। किसानों की आय दुगुना करने की आड़ में ‘अपना कोटाÓ पूरा करने के लिए कृषि विभाग के आला अफसर कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। मिट्टïी के पोषक तत्वों की जांच के लिए एटामिक अब्र्जाशन स्पेक्ट्रो फोटो मीटर (एएएस) मशीनों की खरीद में खूब घालमेल किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस प्रकरण की चर्चा कृषि निदेशालय से लेकर शासन तक है, लेकिन शासन की सहभागिता के कारण हर अफसर ने चुप्पी साध ली है।

बताते चलें कि कृषि विभाग ने मिट्टïी के पोषक तत्वों का सर्वेक्षण के लिए एएएस मशीन खरीदने की टेण्डर प्रक्रिया बीते साल नवम्बर माह से शुरू कर दी थी। यह टेण्डर प्रक्रिया मार्च 2017 में पूरी हुई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चार बार टेण्डर प्रक्रिया में फेल कम्पनी एलीको के पक्ष में निविदा खोल दी गई। सूत्रों का कहना है कि एलीको कम्पनी पहले टेक्निकल प्रक्रिया में फेल हो गई थी। उसके बाद कृषि विभाग के आला अफसरों के हस्तेक्षप के कारण पास हुई। सूत्रों का दावा है कि एलीको कम्पनी ने सबसे पहले एएएस मशीन को मात्र 14 लाख रुपए में उपलब्ध कराने का टेण्डर दिया था। लेकिन कृषि विभाग और शासन के एक आला अफसर की मिलीभगत के चलते 43 एएएस मशीन 26 लाख रुपए प्रति के हिसाब से लगभग 11 करोड़ 18 लाख रुपए की खरीदी गई हंै। इसमें चार करोड़ रुपए सुविधा शुल्क के तौर पर कृषि विभाग और शासन के एक आला अफसर डकार गया है।

कृषि विभाग के एक आला अफसर का कहना है कि जब कि कृषि विभाग में भ्रष्टïाचार के आरोपी निदेशक पद पर बने रहेंगे तो इस तरह के घालमेल होते रहेंगे। मौजूदा समय कृषि विभाग में हर तरफ अव्यवस्था का हाल है। जिसकी वजह से भ्रष्टïाचारियों का बोलबाला है। एएएस मशीनों की महंगी खरीद के मुद्दे पर कृषि निदेशक ज्ञान सिंह ने कहा कि एएएस मशीनों की खरीद प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं की गई है। सभी औपचारिकताएं पूर्ण करके खरीदी गई हैं। लेकिन इस मुद्दे पर प्रमुख सचिव कृषि रजनीश गुप्ता ने कोई भी बात करने से मना कर दिया।

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