21 October, 2018

सुप्रीम कोर्ट ने एस0सी0/एस0टी0 कर्मचारियों के पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर दिये गये आदेश पर राज्य सरकार मौन : भवन नाथ पासवान

डा0 अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच के कार्यालय फ्लैट नं0-2 चंचल काम्पलेक्स, 38 कैन्ट रोड, (बर्लिगटन चैराहा से कैसरबाग की ओर लगभग 100 कदम पर) लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष मा0 भवन नाथ पासवान जी ने प्रेस के सम्मानित साथियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि परम पूज्य बाबा साहब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर ने सामान्य वर्ग की सहमति से भारतीय संविधान के अधीन अनुसूचित जाति /जनजाति के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक रूप से उत्थान हेतु सेवाओं में संविधान के अनुच्छेद 16(4), 16(4)क, 320(4), 335 के अधीन समानता लाने हेतु प्राविधान किया गया था।

 

इस वर्ग के उत्थान एवं प्रगति के लिए दिनांक 26 जनवरी 1950 से अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए प्राविधानित संविधान के अनुच्छेदों को देश के सवर्ण वर्ग ने व्याख्या अपने मस्तिष्क से विभिन्न पटलों पर विभिन्न विचारों को समाज में लेकर वास्तविक आधार से काफी अलग किया गया। जिसका आंकलन करना सम्भव नहीं है।

 

भारतीय संविधान की मूल भावनाओं से हटकर कार्यवाही करना ही भारतीय संविधान की अवहेलना है। अनुसूचित जातियों/ जनजातियों के लोगों को सामाजिक, आर्थिक व शैक्षिक रूप से समानता लाने हेतु जो विकास का मार्ग अनुच्छेदों के माध्यम से प्रशस्त किये गये थे। उन विकास किये जा रहे मार्गो को उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से आर्थिक विकास या सामाजिक विकास या शैक्षणिक रूप से उत्थान या सेवा (नौकरी) के माध्यम से विकास के मार्गो को विभिन्न निर्णयों के माध्यम से अवरोध उत्पन्न किये गये। जिसके कारण अनुसूचित जाति/जनजाति के लोग सामान्य वर्ग की बराबरी का दर्जा 68 वर्षो में नहीं कर सकें।

 

नौकरी में आरक्षण जैसे मुद्दे भी समानता प्रदान करने का एक अभिन्न अंग है। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट कभी पुरानी रोस्टर प्रणाली खत्म किया, कभी पदोन्नति में आरक्षण खत्म किया तो कभी एकल पद का आरक्षण खत्म किया, कभी वरीयता सूची को बदलने का कार्य किया। अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लोगों को नौकरियों में प्रोन्नति के माध्यम से समानता प्राप्त करने का स्रोत था उसे भी न्यायपालिका द्वारा प्रोन्नति में आरक्षण को समाप्त करने का कार्य किया। दिनांक 04.06.2018 को सुप्रीम कोर्ट ने ही पदोन्नति में आरक्षण पूर्ववत् रखने हेतु मौखिक रूप से केन्द्र सरकार को परामर्श दिया है जो राजनीतिक रूप से परिलक्षित हो रहा है।

 

श्री पासवान जी ने कहा कि अब संविधान पीठ को उक्त केस को भेजकर नये तरीके से भारतीय संविधान के अधीन आरक्षण पर व्याख्या किये जाने के लिए प्रस्तावित किया । कई ऐसे उदाहरण है कि न्याय पालिका सवर्ण के प्रकरण को स्वतः संज्ञान में लेने का कार्य करता रहा परन्तु इस देश के 32

 

करोड से अधिक आबादी में रहने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के ज्वलन्त प्रकरण तथा अधिकारों की बातों को न्यायपालिका द्वारा स्वतः संज्ञान में नही लिया जा रहा है। पदोन्नति में आरक्षण की बात किया जाय तो 68 वर्षो बाद भी कई विभागों के विभिन्न कैडरों में अनुसूचित जाति/जनजातियों का प्रतिनिधित्व न के बराबर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिनांक 04.06.2018 के अधीन प्रोन्नतियों में आरक्षण पर उ0प्र0 राज्य सरकार द्वारा कोई वक्तव्य जारी न करके इस पर किसी कार्यवाही को न करने के विचारों को स्पष्ट किया गया है। जबकि उसी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उ0प्र0 की राज्य सरकार ने एक माह के अन्दर एक लाख से ज्यादा अनुसूचित जाति /जनजाति के अधिकारियों /कर्मचारियों को रिवर्ट करने की कार्यवाही की गयी थी। उ0प्र0 सरकार द्वारा ऊपर से बाबा साहब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर द्वारा की गयी कल्पनाओं को पूर्ण करने के लिए बार-बार घोषणा की जा रही है। दूसरी तरफ संविधान के अधीन इस वर्ग के मिले अधिकारों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से छीनने में ज्यादा सक्रियता दिखा रही है।

 

मा0 भवन नाथ पासवान ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुपालन में पूर्व में किये गये पदावनत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियेां /अधिकारियों को एक माह के अन्दर पदोन्नति करते हुए उनको मूल पद पर तैनात करने की कार्यवाही सरकार करें और जिनकी पदोन्नति रोकी गयी थी उनकी पदोन्नति की कार्यवाही पूर्ण किया जाये। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने हेतु डाॅ0 अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच का प्रतिनिधि मण्डल महामहिम राज्यपाल एवं उ0प्र0 सरकार एवं केन्द्र सरकार को ज्ञापन सौपने की कार्यवाही करेगा। तत्पश्चात यदि भारत सरकार एवं उ0प्र0 राज्य सरकार द्वारा मा0 सर्वोच्च न्यायालय के उक्त आदेश के अनुपालन में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों/अधिकारियों की पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था का लाभ देकर पदोन्नति नही की जाती है तो डाॅ0 अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच द्वारा उसे लागू कराने के लिए धरना-प्रदर्शन कर सरकार को बाध्य करेगा। प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से राधेश्याम राम, एडवोकेट पंकज प्रसून, आशाराम सरोज, सुभाष पासी, डा0 यशवन्त सिंह, डा0 पी0के0 राजवंशी, डा0 अयोध्या प्रसाद, सन्तोष कुमार, विशाल सोनकर, बालकराम, ओम प्रकाश, प्रवेश कुमार, शैलेश धानुक आदि उपस्थित थे।

rgautamlko@gmail.com

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