14 December, 2018

पत्रकारों के चुनाव को लेकर तेज हुई हलचल

Uttar Pradesh State Recognized Correspondent Committee, Journlalist Election, Lucknow
त्रिनाथ के. शर्मा
लखनऊ। आगामी 14 अप्रैल को जहां देश की 125 करोड़ जनता संविधान निर्माता और भारत रत्न बाबा साहब डा. भीमराव रामजी ऑबेडकर की 137वीं जयंती को धूमधाम से मनाएगी वहीं सूबे के राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त 700 से अधिक पत्रकार अपने नेता को चुनने के लिए मतदान करेंगे। पहली बार अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और सचिव के लिए युवा पत्रकार मैदान में कूदने से चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है, इससे मठाधीशों में हलचल मच गई है। अपनी बादशाहत बचाने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। पत्रकारों के इस चुनाव पर योगी सरकार भी बारीक नजर रखे हुए हैं।
Uttar Pradesh State  Recognized Correspondent Committee, Journlalist Election, Lucknowबताते चले कि आगामी 14 अप्रैल को उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव के लिए मतदान किए जाने की घोषणा हुई है। तमाम वरिष्ठï पत्रकारों के दबाव की वजह से दो गुटों में बंटी उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव एक समिति के लिए कराए जाने पर सहमति बनी है। नामांकन प्रक्रिया 2 अप्रैल से शुरू किए जाने की तैयारी है। लेकिन अधिकतर पत्रकारों में बात को लेकर रोष है कि बगैर वार्षिक आम बैठक बुलाए चुनाव की डेट 14 अप्रैल को क्यों की गई, उस दिन योगी सरकार बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की जयंती धूमधाम से मनाएंगे। इस अवसर पर कई कार्यक्रम होंगे। जिसमें वर्किंग जर्नलिस्ट्स व्यस्त होंगे। जिसकी वजह से मतदान प्रभावित होगा। इस बात की संभावना है कि 14 अप्रैल के बजाए कोई अन्य तिथि पर चुनाव होने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए लिए पत्रकार और पूर्व अध्यक्ष हेमंत तिवारी, पूर्व अध्यक्ष प्रांशु मिश्र, नीरज श्रीवास्तव, गोलेश स्वामी, प्रभात त्रिपाठी, आलोक पाण्डेय, ज्ञानेन्द्र शुक्ला, दिनेश शर्मा, मनमोहन और रामदत्त त्रिपाठी, भारत सिंह, अरूण त्रिपाठी मैदान में कूदने की तैयारी में हैं। भारी संख्या में युवा और नए पत्रकार उपाध्यक्ष, सचिव कोषाध्यक्ष और सदस्य पद के लिए लडऩे की तैयारी में है। अधिकतर वरिष्ठï पत्रकार अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पैनल बनाने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही प्रचार भी तेज हो गया है।
सूत्रों का दावा है कि कई बार अध्यक्ष रहे हेमंत तिवारी इस बार चुनाव लडऩे के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन समर्थक पत्रकारों का काफी दबाव है। काफी संख्या में पत्रकारों का कहना है कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए हेमंत तिवारी ने पत्रकार हितों की आवाज हर प्लेटफार्म पर उठाते रहे हैं। लघु और माध्यम अखबारों पर जीएसटी थोपे जाने का मामला हो या फिर पत्रकारों के आवासों के नवीनीकरण का प्रकरण हर में मौके पर मुखर तौर पर उठाया है। इसके साथ ही पत्रकारों पर हुए हमलों का मामला हो या फिर मुआवजे का सभी प्रकरणों में शासन और प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभाई है।
कुछ पत्रकारों का कहना है कि दूसरे गुट के अध्यक्ष रहे पत्रकार प्रांशु मिश्र एलीट क्लास के पत्रकारों के हितों के लिए काम करते रहे हैं, जबकि छोटे और लघु अखबारों के पत्रकारों की समस्याओं पर कभी भी ध्यान नहीं दिया। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार प्रभात त्रिपाठी का कहना है कि इस बार भी पत्रकारों की आवाज को उठाने के लिए मैदान में हैं। उनका एजेंडा सभी पत्रकारों को सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं को लाभ मिले। कुछ मठाधीश पत्रकारों के चंगुल से मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति निकले तभी आम पत्रकार का भला होगा।
अध्यक्ष पद के नीरज श्रीवास्तव का कहना है कि उनका लक्ष्य पत्रकारों की मूल समस्याओं के लिए हल करवाने का है। मूल समस्याओं में पत्रकारों की राज्य मुख्यालय मान्यता और आवास आवंटन तथा मेडिकल की सुविधा उपलब्ध कराने की है। इसके साथ ही लघु और माध्यम अखबारों पर थोपी गई जीएसटी को हटवाने के लिए सभी जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा लघु और माध्यम अखबारों को नियमित रोस्टर प्रणाली से विज्ञापन मिले।

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