20 November, 2017

कारनामों से फिर सुर्खियों में गन्ना बाबू

एनडीएस ब्यूरो

लखनऊ। पहले नौकरी पाने में जोड़-तोड़ किया। फिर नियम-कानून को ताक पर रखकर दौलत कमाने का नशा सवार हुआ। इस नशे ने ऐसे-ऐसे गुल खिलाए जिनकी गूंज शासन तक पहुंची और जांच में बर्खास्त किया। इसके बावजूद यह बाबू अपनी राजनीतिक पहुंच और तिकड़म के बल पर सहायक निदेशक बनने की फिराक में है।

उल्लेखनीय है कि लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्था के प्रकाशन अधिकारी राधे श्याम राय के काले कारनामें की गंूज हर तरफ है। अपनी राजनीतिक पहुंच और तिकड़म के बल पर चयन समिति ने बगैर कोई विज्ञापन और बगैर योग्यता के सीधे कम्प्यूटर अधिकारी के पद पर 18 फरवरी 1991 में चयनित किया था। जबकि नियुक्ति आदेश 11 मार्च 1992 में जारी हुए थे। डिप्लोमा कम्प्यूटर सर्टीफिकेट फर्जी साबित हुआ था। 

तैनाती मिलने के बाद किसानों का प्रशिक्षण कार्यक्रम को अपने स्तर से अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बदल दिया था। बगैर किसी आवश्यकता के 3 लाख रुपए के कम्प्यूटर खरीदे थे। 30 नवम्बर 1992 को बगैर चयन समिति के बैठक के प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पदोन्नति हासिल कर ली गई। बाद में चयन समिति के सदस्यों के अलग-अलग हस्ताक्षर करवाए गए। गन्ना संस्थान के स्कालर हॉस्टल में वर्ष 1992 से बगैर किराए के काबिज हैं। जिससे गन्ना संस्थान को अब तक लाखों रुपए के राजस्व की क्षति हो चुकी है। पूर्व विधायक शेर बहादुर सिंह ने विधान सभा में यह मामला उठाया था। इस पर तत्कालीन सरकार ने जांच के आदेश दिए थे। गन्ना उद्योग एवं लम्बे से अपनी हरफनमौला कार्यप्रणाली के बदौलत गन्ना और चीनी विभाग को हथियाए हुए हैं। निजी चीनी मिलों पर काफी मेहरबानी के कारण चर्चा में भी हैं। इसी वजह से यूपी की नौकरशाही ने शुगर डैडी का नेक नेम दिया है। शुगर डैडी ने अपने चहेते अफसर विपिन कुमार द्विवेदी को गन्ना आयुक्त बनवाया था। जिससे गन्ना विभाग को अपने इशारों पर चलाया जा सके। गन्ना आयुक्त ने गन्ना संस्थान के साबित सबसे भ्रष्टï प्रकाशन अधिकारी राधे श्याम राय से सांठ-गांठ कर ली है। गौरतलब हो कि गन्ना आयुक्त का रिटायरमेंट इसी माह में है। लेकिन गन्ना आयुक्त ने नियम कानून को ताक पर रखकर अपने कमाऊ पूत को उपकृत करने के लिए सहायक निदेशक पर डीपीसी कर दी है। बस प्रमुख सचिव गन्ना की मुहर लगनी बाकी है। इसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार स्टेनोग्राफर्स महासंघ और कर्मचारियों ने गन्ना आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गन्ना मंत्री और प्रमुख सचिव गन्ना को पत्र लिखकर जांच करवाने और डीपीसी को निरस्त करवाने की मांग की है।

सूत्रों का कहना है कि  उत्तर प्रदेश सरकार स्टेनोग्राफर्स महासंघ और कर्मचारियों के पत्र पर प्रमुख सचिव गन्ना ने गन्ना आयुक्त से आख्या तलब की है। जिस पर गन्ना आयुक्त ने आनन-फानन में प्रकाशन अधिकारी राधे श्याम राय को सहायक निदेशक पद पर पदोन्नति के लिए सभी आपत्तियों को ठीक करवाकर फाइल प्रमुख सचिव गन्ना के पास भेज दी गई है। जिस पर जल्द मुहर लग जाएगी। इस संबंध में प्रकाशन अधिकारी राधे श्याम राय ने कहा कि उनके विरोधी उनके खिलाफ अर्नगल आरोप लगा रहे हैं। गन्ना आयुक्त विपिन कुमार द्घिवेदी और प्रमुख सचिव गन्ना ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है।

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