19 July, 2018

नए साल का था आगमन,औऱ खुशियां थी चहुँ ओर। कहीँ मिठाई बट रही, ढोल नंगाड़ो का था कहीं शोर।। नाच गा कर उस रात हम सब नींद चैन की सोये थे। पुलवामा में सीआरपीएफ के, 5 लाल हमने खोये थे।। माओं की गोद हुई सूनी, सिंदूर पूत रहा है मांगो का। [caption id="attachment_39441"

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