21 October, 2018

वित्त मंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप!

त्रिनाथ के. शर्मा
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लाख प्रयासों के बावजूद मंत्री अपना दामन साफ नहीं रख पा रहे हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग से अजिज वित्त विभाग के कनिष्ठï अफसरों ने जहां सूबे के वित्त मंत्री पर भ्रष्टïाचार के आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है वहीं राज्यपाल को चि_ïी लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा है। लेकिन वित्त विभाग ने चुप्पी साध रखी है।
23 जून 2018 को प्रदेश के राज्यपाल के कार्यालय में वित्त मंत्री और परिजन व निजी सचिव पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में 25-30 लाख रुपए लेने के आरोप लगाए हैं। पत्र में वित्त एवं लेखा सेवा के कनिष्ठï अफसरों ने अपनी व्यथा-कथा का उल्लेख करते हुए कहा है कि वित्त विभाग में अब मेरिट के आधार पर ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं हो रहे हैं। इस काम में वित्त सेवा के कुछ दागी अफसर निजलिंगप्पा, संतोष अग्रवाल, मुकुल अग्रवाल, स्वतंत्र गुप्ता और प्रवीण गुप्ता के जरिए ट्रांसफर-पोस्टिंग के जरिए भारी धन की उगाही हो रही है। स्थानातंरण नीति के विरूद्घ 90 फीसदी ट्रांसफर किए गए हैं। ट्रांसफर के लिए प्रमुख सचिव वित्त के प्रस्ताव को मंत्री के कैंप में बदल दिए जाते हैं। दावा किया गया कि लगाए गए सभी आरोप फाइलों में सही पाए जाएंगे। वित्त मंत्री के काकस के भय की वजह से अपना नाम नहीं लिख पा रहे हैं। मामले की जांच कराई जाए। राज्यपाल ने यह पत्र सरकार को भेजा। प्रमुख सचिव वित्त को यह पत्र 28 जून 2018 को प्राप्त हुआ। इसके बाद यह पत्र वित्त विभाग में दबा हुआ है।
वित्त विभाग के सूत्रों का कहना है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर पूर्व प्रमुख सचिव से भी मंत्री की काफी टकराव हुआ था। इस वजह से प्रमुख सचिव का ट्रांसफर भी हो गया था। बीते 17 माह में वित्त विभाग में वित्त सेवा के लगभग 300 से अधिक अफसरों के तबादले हुए हैं। कुछ को लम्बे समय तक प्रतीक्षारत रखा गया है। कुछ का तबादला करने के बाद स्थगन का आदेश किया गया है। वर्तमान प्रमुख सचिव वित्त ईमानदार छवि के होने के कारण विभाग का हर अफसर उनकी बेबसी समझ रहा है। यही वजह है कि वित्त सेवा के अफसरों ने न्याय के लिए गुमनाम पत्र राज्यपाल को लिखा है। इसकी प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और कुछ अखबारों को भेजी गई है। इस संबंध में प्रमुख सचिव वित्त संजीव मित्तल और वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल से कई बार सम्पर्क किया गया। लेकिन जवाब नहीं मिला।

 

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