20 June, 2018

प्राचीन विधा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है अजन्ता के चित्र : बिरथरे

  • विशिष्ठ कला शिविर का हुआ शुभारंभ

ललितपुर। सिद्धनरोड स्थित कला भवन में प्रख्यात चित्रकार ओ.पी.बिरथरे द्वारा आयोजित विशिष्ट कला शिविर पेन्टिंग विद ऑयल कलर का शुभारम्भ मुख्य अतिथि नेमवि प्रबंधक प्रदीप चौबे एवं अध्यक्ष प्रभात कुमार दीक्षित की अध्यक्षता एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित अजय जैन द्वारा दीप प्रजज्वलन एवं सरस्वती पूजन के साथ हुआ। शिविर आयोजक ओमप्रकाश बिरथरे ने इस शिविर की महत्तवताओं पर प्रकाश डालते हुये कहा कि शिविर में माध्यम तैलरंग, कैन्वास, ब्रश एवं नाईफ का प्रयोग विभिन्न विधाओं जैसे स्ट्रोक, पैचिज आदि का प्रयोग करते हुये चित्र का निर्माण किया जाता है। इस तकनीकि से निर्मित चित्र सैकड़ो वर्षो तक खराब नहीं होते है। प्राचीन काल में इस विधा का बहुत उपयोग होता था अजंता के चित्र इसके सजीव उदाहरण है। ऐसे शिविर अभी तक केवल बड़ों शहरों में ही आयोजित हो पाते है। इस शिविर में 30 कला साधक प्रतिभाग कर रहे है। मुख्य अतिथि ने कहा चित्रकला का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना मानव का इतिहास। मानव ने जबसे जन्म लिया है तभी से उसने सजृनात्मकता की ओर बढ़ते हुये चित्रों को बनाना आरम्भ कर दिया था। कला मानव अभिव्यक्ति का सक्षक्त माध्यम है। ओ.पी.बिरथरे जी द्वारा आयोजित शिविर नवोदित कलाकारों को नया मार्ग प्रशस्त करते हुये श्रेष्ठ कला साधक बनने में व व्यवसाय में पहचान बनाने में सहायक सिद्ध होगें। अध्यक्षता कर रहे प्रभात दीक्षित ने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन चित्रकला से ओतप्रोत है। ये जीवन की कुन्ठाओं और निराशा को दूर तक सकारात्मकता की ओर ले जाती है। बच्चों को सीखने का अच्छा अवसर मिला है जिसमें छात्र लगन व परिश्रम से ज्ञान अर्जित करते हुये अच्छे कला साधक बनें। विशिष्ट अतिथि ने कहा कि जनपद में कला के क्षेत्र में बहुत संभावनायें है। इस शिविर में गुरूकुल जैसा वातावरण देखने को मिला। जनपद में सरोवर, झरने, झीलें, नदियां, पहाड़ आदि प्राकृतिक स्थल मौजूद है जिनका चित्रण कर छात्र अपने जनपद की कलाकृृतियों को विश्व पटल पर पहचान दे सकते है। इंटेक संयोजक संतोष कुमार शर्मा एवं आनन्द कुमार त्रिपाठी पूर्व प्रधानाध्यापक ने भी षिविर को संबोधित किया। इस दौरान कला भवन की ओर से अतिथियों को समृति चिन्ह भेंट किया गया। शुभारम्भ अवसर पर डा.रमेश किलेदार, पर्यटन मित्र फिरोज इकबाल, अमित तिवारी, डा.प्रबल सक्सैना, डा.विकास गुप्ता, दीपक नामदेव, कैलाश जैन, गोविन्द व्यास, इन्दर राजा, गोविन्द राम सैन, जयन्त चौबे, अवधेष त्रिपाठी, उर्वशी गुुप्ता, कप्तान सिंह, प्रीति चौबे, चित्रंगना ठाकुर, सुमित विश्वकर्मा आदि सहित अनेकों कला साधक उपस्थित रहे। अन्त में आभार कलाविद्ध ओपी बिरथरे ने किया। संचालन आचार्य सत्यनारायण तिवारी ने किया।

rgautamlko@gmail.com

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