21 October, 2018

बगैर एग्रीमेंट के विजक्राफ्ट को दिया ठेका!

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ। योगी सरकार के मेगा इवेंट इंवेस्टर्स समिट के दौरान राष्टï्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा और अतिथ्य में बरती गई लापरवाही को लेकर जिलाधिकारी लखनऊ की चि_ïी को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) ने ठंडे बस्ते में डाल दी है। महज खानापूर्ति के लिए बनी कमेटी के सदस्य दो माह में स्थालीय परीक्षण के बजाए एसी के कमरों में बैठकर इवेंट इंवेस्टर्स समिट के खर्चों का आकलन करने में पसीना बहा रहे हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के आला अफसर कितने राष्टï्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में बरती गई लापरवाही की जांच को लेकर कितने संजीदा हैं।
मालूम हो कि बीती 21 और 22 फरवरी को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठïान में योगी सरकार ने एक मेगा इवेंट इंवेस्टर्स समिट का आयोजन करवाया था। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और समापन राष्टï्रपति रामनाथ कोविद ने किया था। इसके साथ ही देश के सैकड़ों लब्ध प्रतिष्ठिïत उद्योगपतियों ने भी शिरकत की थी। इंवेस्टर्स समिट के दौरान 4.28 लाख करोड़ का निवेश यूपी को प्राप्त होने के दावे किए गए थे। इस इंवेस्टर्स समिट की देश में खूब तारीफ हुई थी। लेकिन 23 मार्च 2018 को लखनऊ के जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने आईआईडीसी को एक पत्र लिखकर सफल मेगा इवेंट इंवेस्टर्स समिट पर सवाल खड़े कर दिए।
उद्योग बंधु के अधिशासी निदेशक संतोष यादव ने कहा कि लखनऊ के डीएम कौशल राज के पत्र पर आईआईडीसी ने एक जांच समिति का गठन किया है। समिति ने जांच शुरू कर दिया है। जांच की प्रक्रिया
पूरी होने के बाद ही तय हो पाएगा, कौन दोषी है। आईआईडीसी अनूप चंद्र पाण्डेय ने कहा कि डीएम लखनऊ के पत्र पर जांच कमेटी बना दी गई है। जांच आने पर पर ही कोई प्रतिक्रिया दी जा सकती है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि भ्रष्टïाचार पर योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। अगर किसी ने कोई अनियमितता की है तो उसके खिलाफ जांच करवा कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी विज क्राफ्ट पर अफसर रहे मेहरबान
इंवेस्टर्स समिट के आयोजन का कार्य संभालने वाली विज क्राफ्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाले लखनऊ के जिलाधिकारी के मत सही हो सकता है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के आला अफसर इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी विज क्राफ्ट पर काफी मेहरबान रहे हैं। यही वजह है कि नियम-कानून को ताक पर रखकर विजक्राफ्ट को आयोजन के लिए लगभग 13 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उद्योग बंधु ने इस कार्य को कराने के लिए निविदा तो जरूर आमंत्रित की थी, लेकिन ठेका विजक्राफ्ट को बगैर कोई एग्रीमेंट के दे दिया है। इस बात का खुलासा जनसूचना अधिनियम के तहत सूचनाएं न उपलब्ध कराने से हुआ है।
लखनऊ के डीएम के पत्र ने खोली पोल
लखनऊ के जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने आईआईडीसी को लिखे पत्र में उल्लेखित किया है कि राष्टï्रपति, प्रधानमंत्री और गणमान्य उद्योगपतियों के अतिथ्य और सुरक्षा व्यवस्था में कार्यदायी संस्था विजक्राफ्ट द्वारा भारी लापरवाही बरती गई। विजक्राफ्ट के प्रतिनिधियों का रवैया बहुत ही गैरजिम्मेदराना रहा। व्यवस्था सुधार के लिए जब भी विजक्राफ्ट के प्रतिनिधियों से कहा गया तो यही उत्तर देते थे कि उच्चतम स्तर से इस काम के लिए निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। विजक्राफ्ट की इस कार्यप्रणाली से उत्तर प्रदेश की अतिथ्य छवि प्रभावित हुई है। विजक्राफ्ट द्वारा बरती गई गंभीर कमियों की जांच कराई जाए। साथ ही भुगतान पर रोक लगाई जाए। जिलाधिकारी ने अपने इस पत्र के साथ पुलिस अधीक्षक द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को इंगित करता पत्र और लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा कराए गए कार्यों को लेकर लिख गया उपाध्यक्ष का पत्र भी आईआईडीसी को भेजा था।
एसी के कमरों में बैठकर हो रहा है भौतिक सत्यापन
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के सूत्रों का कहना है कि 23 मार्च 2018 को जिलाधिकारी के पत्र के बाद से शासन और आईआईडीसी के कार्यालय में हड़कम्प मच गया। लखनऊ के जिलाधिकारी के पत्र को दबाने के लिए आईआईडीसी ने एक समिति का गठन कर दिया है।
इस संबंध में समिति एक बैठक कर चुकी है। समिति को समझ में नहीं आ रहा है कि इंवेस्टर्स समिट के दौरान किए गए कार्यों का कैसे भौतिक सत्यापन करें। यही वजह है कि इंवेस्टर्स समिट के दौरान विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों के पैसे का भुगतान अभी तक लटका हुआ है। आईआईडीसी उद्योग बंधु के अधिशासी निदेशक और और विशेष सचिव को भुगतान जल्द कराने के आदेश दिए हैं। लेकिन यह दोनों अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए किसी भी भुगतान की फाइल को हरी झण्डी नहीं दे रहे हैं। साथ ही अपना ट्रांसफर करवाने के लिए भी लगे हुए हैं।

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