16 December, 2018

दलितों के कृष्ण हैं योगी आदित्यनाथ

एनडीएस ब्यूरो
लखनऊ। आंबेडकर महासभा ने 14 अप्रैल को डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र सम्मान देने की घोषणा की है। लेकिन इस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। महासभा के ही दूसरे संस्थापक सदस्यों ने अवैधानिक बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी निर्मल ने योगी आदित्यनाथ को महासभा की ओर से प्रथम दलित मित्र सम्मान देने की घोषणा की थी। इस फैसले का महासभा के सदस्य पूर्व आईपीएस एस.आर. दारापुरी और पूर्व आईएएस हरीश चंद्रा ने कड़ा विरोध किया है। दोनों सदस्यों ने आमसभा की बैठक बुलाकर लालजी निर्मल के खिलाफ  कार्रवाई तक की मांग की है। एसआर दारापुरी का कहना है कि महासभा की किसी भी सामान्य और प्रबन्धकारिणी समिति की बैठक में किसी भी समय आंबेडकर रत्न या दलित रत्न से विभूषित करने का न तो कोई प्रस्ताव आया और न ही इस प्रकार का कोई निर्णय लिया गया। दारापुरी का आरोप है कि प्रदेश में दलित इस समय उत्पीडि़त है। फर्जी मुकदमे लिखवाए जा रहे हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री को दलित सम्मान देना कतई ठीक नहीं है। महासभा के संविधान में इस तरह के सम्मान देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसका खुलकर विरोध होगा।
अम्बेडकर महासभा के राष्टï्रीय अध्यक्ष डॉ लालजी निर्मल इसमें कुछ भी गलत नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि हम समाजिक संगठन हैं। हर सरकार से मित्रवत व्यवहार रखना हमारा कर्तव्य है। अगर हमें अपने समाज का उत्थान करना है तो सरकार से संबंध मधुर रखने पड़ेंगे। महासभा ने इस माध्यम से बड़े-बड़े काम करवाए हैं। हमारे यहां प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति सभी आ चुके हैं। यह बड़े गर्व की बात है। अगर हम सीएम का सम्मान करते हैं तो इसमें बुरा क्या है। वह प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते सबके मित्र हैं। जो लोग इसके खिलाफ हैं, वे उचित फोरम पर अपनी बात रखें। सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए बातें करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आना तय है, लेकिन इस बात की अभी तक सहमति नहीं मिली है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलित मित्र अवार्ड स्वीकारेंगे या नहीं।
गुरू की परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं योगी
सूबे में योगी सरकार बनने के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलितों के उत्थान के लिए कई कार्य और महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। दलित समाज की समस्याओं का उत्थान के लिए कई स्तरों पर सख्त निर्देश दिए हैं। राजधानी लखनऊ और नोएडा में बने दलित महापुरूषों के स्मारकों के जीर्णाेदार के लिए जहां बजट आवंटित किया वहीं इंवेस्टर्स मीट के दौरान अम्बेडकर स्मारकों को खूब सफाई-व्यवस्था और जीर्ण-शीर्ण कार्यो को प्राथमिकता से करवाया था। इसके साथ ही दलितों के मसीहा भारत रत्न बाबा साहब डा. भीमराव रामजी अम्बेडकर के चित्र सभी सरकारी कार्यालयों में लगवाए जाने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही बाबा साहब की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है। बाबा साहब के नाम में रामजी जोडऩे का आदेश किया। दलित बहुल्य बस्तियों में निशुल्क बिजली कनेक्शन का अभियान चलाया है। अति दलितों को आरक्षण दिए जाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री बनने से पूर्व योगी आदित्यनाथ अपने गुरू अवैधनाथ की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए पूर्वांचल में जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए गांव-गांव दलित बस्तियों में सामाजिक समरसता महाभोज की परम्परा को जारी कर रखा है। इसके साथ ही दलितों को उत्पीडऩ करने वालों को सख्त सबक सिखाते थे। वरिष्ठï पत्रकार इंद्रमणि त्यागी का कहना है कि मुख्यमंत्री बनने से पूर्व योगी आदित्यनाथ कर दलितों के प्रति ठीक वैसा ही रवैया रहा है जैसा कि भगवान कृष्ण का सुदामा के साथ रहा है। योगी जी गोरक्षपीठ के महंत के दौरान समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को हर तरह से मदद करते थे।

 

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