14 December, 2018

हरे चारे का आसान विकल्प ‘एजोला ’

नयी दिल्ली। हरे चारे की कमी का सामना कर रहे किसानों के लिये प्रोटीन और खनिज पदार्थों से भरपूर ‘एजोला’ एक अच्छा विकल्प हो सकता है जिसे जलजमाव वाले इलाके में आसानी से उगाया जा सकता है तथा इससे दुधारु पशुओं में दूध का उत्पादन 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है । 

 

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार दुधारु पशुओं को नियमित रुप से एजोला खिलाने से 10 से 20 प्रतिशत तक दूध का उत्पादन बढ़ता है । इससे पशुओं के खिलाये जाने वाले अनाज की मात्रा को कम करने में भी मदद मिलती है। वैज्ञानिक ढंग से पशुपालन करने वाले किसान 10 किलो दूध देने वाली संकर नस्ल की गाय को 5.5 किलो अनाज के दाने को उबाल कर खिलाते हैं। उसी गाय को यदि दो किलो एजोला खिलाया जाता है तो दो किलो कम अनाज खिलाना पड़ेगा और दूध का उत्पादन भी बढ़ जायेगा। 

 

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ धर्म प्रकाश श्रीवास्तव के अनुसार एजोला में करीब 30 प्रतिशत प्रोटीन होता है जो लाइसिन, अर्जिनीन और मिथायोनीन का मुख्य स्त्रोत है। इससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। एजोला कम मात्रा में लिग्निन होता है जिससे इसका पाचन सही तरीके से हो जाता है। इसमें 10 से 15 प्रतिशत खनिज, बीटा कैरोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटाशियम, फास्फोरस, आयरन और कॉपर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। 

 

आम तौर पर एक हेक्टेयर में 200 टन हरे चारे का उत्पादन होता है जबकि इतने ही क्षेत्र में 1000 टन एजोला का उत्पादन होता है। एजोला बुनियादी तौर पर पानी पर तैरने वाला फर्न है जो बहुत तेजी से बढ़ता है। इसका उत्पादन तालाब, नदी, जल जमाव वाले क्षेत्रों तथा प्लास्टिक सीट में पानी जमा कर किया जा सकता है। दो मीटर लम्बे, दो मीटर चौड़े प्लास्टिक सीट में 0.2 मीटर पानी जमा कर एजोला का उत्पादन किया जाता है। इसमें 10 से 15 किलोग्राम उपजाऊ मिट्टी बिछाई जाती है इसमें दो किलो गाय का गोबर और 30 ग्राम फास्फेट मिलाया जाता है। इसके बाद 10 सेन्टीमीटर पानी भर दिया जाता है और एक किलो एजोला कल्चर का छिड़काव किया जाता है। करीब 10 से 15 दिन बाद इसमें से प्रतिदिन 500 से 600 ग्राम एजोला का उत्पादन होने लगता है। इसके उत्पादन पर 65 पैसे किलो की लागत आती है जबकि अनाज पर बहुत अधिक खर्च करना पड़ता है। पांच दिन पर इसमें 20 ग्राम फास्फेट, और एक किलो गोबर डाला जाता है। इसमें आयरन, कापर सल्फर भी मिलाया जाता है। 

 

एजोला के प्रयोग से अनाज पर खर्च कम होने और दूध का उत्पादन बढ़ने से किसानों को अधिक फायदा होता है। यह उन किसानों के लिए भी लाभदायक है जिनके पास जमीन नहीं है लेकिन वे दुधारु पशुओं का पालन करते हैं। इसे गाय, भैंस, बकरी, सुअर और मुर्गियों को भी खिलाया जाता है। 

 

एजोला की लम्बाई दो से तीन सेन्टीमीटर होती है लेकिन अधिक उत्पादन के लिए इसकी कटायी एक सेन्टीमीटर पर करनी चाहिये। पशुओं को एजोला खिलाने के पहले इसे अच्छी तरह से धोना चाहिये ताकि गोबर की गंध पूरी तरह से समाप्त हो जाये। इसका उत्पादन किसी भी क्षेत्र में किया जा सकता है। इसके प्रयोग से पशुओं में बांझपन की दर में भी कमी आताी है। दुधारु पशुओं के पोषण और उन्हें स्वस्थ रखने में हरे चारे का महत्वपूर्ण योगदान है लेकिन देश में हरे चारे की भारी कमी है। देश में केवल 5.25 प्रतिशत जमीन पर ही हरा चारे का उत्पादन किया जाता है ।

rgautamlko@gmail.com

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