21 October, 2018

झूठ के पौधे रोप रहा है वन विभाग!

  • पौधारोपण में ऐतिहासिक रिकार्ड, वन घनत्व बढ़ाने में फिसड्डी
राजेन्द्र के. गौतम
लखनऊ। यूपी में नौ करोड़ के पौधारोपण की ऐतिहासिक उपलब्धि को वन विभाग छिपाकर रखना चाहता है। तभी तो बीते 11 साल में उत्तर प्रदेश में किए गए वृक्षारोपण से बढ़े वन घनत्व, पौधों की प्रजातियां, नर्सरियों से खरीद-फरोख्त का विवरण और व्यय धनराशि की सूचना जनसूचना अधिनियम के जरिए मांगे जाने से वन विभाग में हड़कम्प मच गया है। जहां वन विभाग इस सूचना को छिपाने के लिए हर पैंतरे अजमा रहा है वहीं विभागीय अफसरों ने चुप्पी साध ली है।
मालूम हो 22 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में बीते 11 सालों में मायावती सरकार में 4 करोड़, अखिलेश यादव की सरकार में 6 करोड़ और योगी आदित्यनाथ की सरकार में वन विभाग ने 9 करोड़ वृक्षारोपण किए हैं। अब जरा इंडिया स्टेट ऑफ  फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2017 की रिपोर्ट पर गौर फरमाईए, जिसमें उल्लेखित किया गया है कि पिछले दो साल में भारत के वन क्षेत्र में एक फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। यह 2015 के 7,01,495 वर्ग किलोमीटर से 2017 में बढ़कर 7,08,273 वर्ग किलोमीटर हो गया है। यानी कुल वनक्षेत्र में 6,778 वर्ग किलोमीटर का इजाफा हुआ है। इस दौरान आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और तेलंगाना में वन क्षेत्र में सबसे ज्यादा बढ़त हुई है। इस मामूली इजाफे के बाद देश का वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल के 21.54 फीसदी तक पहुंच गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने फरवरी 2018 में इंडिया स्टेट ऑफ  फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2017 जारी करते हुए यह जानकारी दी। इस रिपोर्ट में यह सामने आया कि देश में कुल वन और वृक्ष क्षेत्र बढ़कर 8,02,088 वर्ग किलोमीटर हो गया है। यह कुल 8,021 वर्ग किलोमीटर की बढ़त है। वर्ष 2015 के आकलन के अनुपात में यह कुल 1 फीसदी का इजाफा है। अब देश के कुल 24.39 प्रतिशत भू-क्षेत्रफल पर वन और वृक्ष क्षेत्र है। बीते एक दशक से उत्तर प्रदेश की सरकारों द्वारा लगवाए जा रहे प्रत्येक वर्ष करोड़ों पौधों के बावजूद देश के वन घनत्व को बढ़ाने में यूपी का कोई भी योगदान नहीं है। वन और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि एक दशक पूर्व तक प्रदेश में पौधों के रोपण का कल्चर नहीं था। बीज से रोपित किए गए पौधे तेजी से विकसित होते थे। बीज से पैदा किए गए पौधों पर खर्च भी कम आता था। लेकिन अब पौधों से पौधारोपण हो रहा है। इससे पौधे लम्बे समय तक जीवित नहीं रहते हैं।
निष्पक्ष दिव्य संदेश के संवाददाता द्वारा जनसूचना अधिनियम के तहत मांगे गए वृक्षारोपण  के विवरण से वन विभाग ने अपनी उपलब्धियों को छिपाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रखी है। वन विभाग ने पौधारोपण से सभी संबंधित सूचनाओं को छिपाने के लिए जवाब दिया है कि वन विभाग के अमुक विभागाध्यक्ष के क्षेत्राधिकार अधीन है। कृपया संबंधित से सम्पर्क करें। जबकि पौधारोपण की अधिकतर जानकारी वन विभाग की वेबसाईट पर उपलब्ध हैं। वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि वृक्षारोपण के कार्यक्रम में वन विभाग आंकड़ों की बाजीगरी करके खूब वाहवाही लूट रहा है। हर साल पौधारोपण के जरिए वन विभाग के अफसर अपनी जेबें भरते हैं। जबकि धरातल पर पौधारोपण कार्यक्रम पूरी तरह से फेल है। वन विभाग के पास पौधारोपण के आंकड़ों का सटीक जवाब नहीं है। इस वजह से जवाब देने से कतरा रहे हैं। वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एस.के. उपाध्याय ने काफी व्यस्तता है, इस संबंध में कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं।

 

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