17 October, 2018

भाजपा के प्रवक्ता पद से होगी मठाधीशों की छुट्टी!

त्रिनाथ के. शर्मा
लखनऊ। लोकसभा चुनाव के मद्ïदेनजर भाजपा ने कील-कांटा लेकर अपने किले को दुरूस्त करना शुरू कर दिया है। जहां भाजपा की भावी कार्यकारिणी में युवाओं को ज्यादा से ज्यादा अवसर देने पर मंथन चल रहा है वहीं मीडिया विभाग के कुछ मठाधीश पदाधिकारियों के पर कतरे जाने की तैयारी है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने बीते अगस्त महीने में प्रदेश की जिम्मेदारी संभाली थी, लेकिन तब से अब तक संगठन के लगातार कार्यक्रमों और हाईकमान की चुनावी व्यस्तताओं के कारण प्रदेश कार्यकारिणी गठन का काम अधूरा पड़ा है, लेकिन इस महीने इस काम ने गति पकड़ी है। सब कुछ दिल्ली में ही तय होना है परंतु पद की लालसा में जिलों से कार्यकर्ता आकर लखनऊ में डेरा डाले हैं। प्रदेश में पार्टी की सरकार होने के कारण पद पाने की होड़ है। कार्यकारिणी के गठन के बाद प्रकोष्ठों का भी गठन किया जाना है। हांलाकि इस बार प्रकोष्ठों की संख्या कम ही होने की उम्मीद है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि सबसे ज्यादा इस बार हाईकमान का फोकस मीडिया टीम पर है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भविष्य में होने वाले लोकसभा चुनाव में यूपी से 80 सीट हासिल करने का लक्ष्य  है। पार्टी रणनीतिकार जानते हैं कि प्रचार प्रसार का चुनाव में महती भूमिका होती है इसलिए वो वर्तमान मीडिया पदाधिकारियों से छुट्ïटी पाना चाहती है। प्रदेश प्रवक्ता की टीम में अधिकतर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के समय से अब तक इन महत्वपूर्ण पदों पर कुंडली मारे बैठे हुए हैं। यही नहीं, वर्तमान पदाधिकारी पार्टी का प्रचार कम और खुद का प्रचार अधिक करने में दिलचस्पी रखते आये हैं।
सोशल मीडिया पर भी खुद की इमेज को और बेहतर करना इनका लक्ष्य रहता है। मौजूदा समय भाजपा के प्रदेश प्रवक्ताओं में शलभ मणि त्रिपाठी, डा. मनोज मिश्रा, मनीष शुक्ला, डा. चंद्रमोहन, अनिला सिंह, राकेश त्रिपाठी है। इन प्रवक्ताओं में सबसे खराब परफार्मेंस मनीष शुक्ला और राकेश त्रिपाठी व डा. चंद्रमोहन की बताई जा रही है। इन प्रवक्ताओं की सबसे अधिक शिकायतें भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची हैं। हाल के दिनों में दिल्ली हाईकमान की एक टीम ने इनके फेसबुक आदि को जब खंगाला तो ये सच्चाई सामने आई जिसके बाद से ऐसे पदाधिकारियों पर निगाह तिरछी है। भाजपा की जल्द घोषित होने वाली कार्यकारिणी में पूर्वांचल के दबदबा होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। यही नहीं संघ से जुड़े कुछ लोगों की सीधे पार्टी में जिम्मेदारी देने की भी रणनीति पर विचार चल रहा है।
भाजपा बता रही है पूर्व डीपीजी की जाति
प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बृजलाल को तेजतर्रार दलित आईपीएस अफसर के रूप में भले ही जानते थे, लेकिन उनकी जाति के बारे में हर व्यक्ति को नहीं पता था। विद द डिफरेंस का दावा करने वाली भाजपा पार्टी को ज्वाईन करते ही उनकी जाति भी बतानी शुरू कर दी है। यूपी भाजपाडॉटओआरजी की वेबसाइट पर मीडिया पैनल में जाने पर स्थिति साफ हो जाती है। जहां मीडिया पैनल के प्रथम पायदान पर बृजलाल कोरी, पूर्व डीजीपी का उल्लेख है। वरिष्ठï पत्रकार सी. लाल का कहना है कि अपनी नौकरी के कार्यकाल में बृजलाल अपने नाम के आगे जाति भी नहीं लिखते थे। अगर अब अपने नाम के आगे जाति लिखनी पड़ रही है तो इससे बड़ी त्रासदी और क्या होगी। पूर्व डीजीपी और भाजपा के मीडिया पैनल में शुमार बृजलाल से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

 

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