25 September, 2018

दलितों में कोई गुस्सा नहीं, यह कुछ लोगों का प्रायोजित ड्रामा है : आदित्यनाथ योगी

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अपने एक साल के कार्यकाल में काफी संभल कर बोलते देखे गए हैं. प्रदेश में हाल में दलितों के आंदोलन की वजह से कई जिलों में काफी बवाल मचा. कई सवालों को लेकर प्रदेश के दलितों में गुस्सा देखा जा सकता है, लेकिन सीएम योगी का कहना है कि प्रदेश के दलितों में किसी तरह का गुस्सा नहीं है और यह कुछ लोगों की साजिश है.

 

बढ़ता जातिगत टकराव

 

यूपी में जातिगत टकराव बढ़ रहा है. हाल में हुआ दलितों का आंदोलन इसका उदाहरण है. इस बारे में यूपी सरकार क्या कर रही है, इस सवाल पर सीएम ने कहा, ‘राज्य में कभी भी सवर्णों और अनुसूचित जाति का टकराव नहीं देखा गया है. यूपी में 75 जिले हैं, हाल के भारत बंद के दौरान सिर्फ तीन-चार जिलों में ही बवाल हुआ है. इन घटनाओं के पीछे जातिगत टकराव नहीं है. जो लोग दलितों के नाम पर हिंसा की साजिश रच रहे हैं, उनका नाम उजागर हो गया है. हमने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है.’

 

तो फिर सवाल उठता है कि दलितो में इतना गुस्सा क्यों है, इस पर सीएम योगी ने कहा, ‘यह तो दलित गुस्से का मामला ही नहीं है. यह उन लोगों का प्रायोजित ड्रामा है, जो दलित मसले का राजनीतिकरण करना चाहते हैं या उनको मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं. दलितों के लिए जितना बीजेपी ने किया है, उतना किसी और ने नहीं किया है.’

 

एससी-एसटी एक्ट के बारे में

 

क्या आपको लगता है कि एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर दलितों का गुस्सा जायज है, इस सवाल पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचार प्रकट करने का अधिकार है. लेकिन जो लोग दलितों के नाम पर हिंसक प्रदर्शन का सहारा ले रहे हैं, उनका भंडाफोड़ होगा. उनके असली इरादों का एक दिन पता चल ही जाएगा.’

 

सीएम ने कहा, ‘दूसरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय कोई नया नहीं है. करीब 11 साल पहले मायावती सरकार ने ऐसा ही आदेश पारित किया था. केंद्र सरकार ने तो यह भरोसा भी दिया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर करेगी.’

 

बाबा साहब के नाम में ‘रामजी ‘ जोड़ने पर

 

यूपी सरकार ने बाबा साहब अंबेडकर के नाम में ‘रामजी’ जोड़ दिया है, क्या यह प्रतीकवाद की राजनीति नहीं है, इस सवाल पर योगी ने कहा कि इस बारे में दो प्रस्ताव सरकार को मिले थे. उन्होंने कहा, ‘पहला प्रस्ताव राज्यपाल के पास से आया था कि उनका नाम ‘आंबेडकर’ है, न कि ‘अंबेडकर’ और बाबा साहब ने संविधान की मूल प्रति में अपना दस्तखत ‘भीमराव रामजी आंबेडकर’ के रूप में किया है, इसलिए उनका नाम यही होना चाहिए. दूसरा प्रस्ताव अम्बेडकर महासभा की तरफ से आया, जिसमें यह अनुरोध किया गया कि राज्य सरकार के सभी कार्यालयों में बाबा साहब की तस्वीर होनी चाहिए. हमने दोनों प्रस्तावों को तत्काल लागू कर दिया.’

rgautamlko@gmail.com

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