16 December, 2018

‘चिप्स’ की खातिर बलि चढ़ रहे कछुए

इटावा। चंबल की सुरम्य वादियों के बीच कलकल बहती चंबल नदी में विचरते विशेष प्रजाति के कछुये ‘चिप्स’ की खातिर शिकारियों की निगाह में चढे हुये हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के संरक्षण अधिकारी डा.राजीव चौहान का कहना है कि असल मे कछुए की चिप्स से बनने वाले सूप से इसको इस्तेमाल करने वाले के शरीर मे शारीरिक क्षमता का खासी तादात मे इजाफा होता है । सूप के इस्तेमाल के बाद सेक्स पॉवर बढ जाती है इसलिए कछुए के चिप्स का सूप सामान्य थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर मे एक लाख से दो लाख रूपये मे उपलब्ध होता है। इन दोनो मे सूप के लिए इस्तेमाल किये जाने के इरादे से ही कछुओं की चिप्स को बडे पैमाने पर तस्करी करने का भी काम बदस्तूर जारी है ।

इटावा के वन रेंज अफसर एन.एस.यादव का कहना है कि चंबल आदि नदियो से कछुए की चिप्स निकालने का काम करने मे कछुआ तस्कर जुटे हुए है। ऐसी खबरे उनके गुप्तचरो के माध्यम से आ रही है। कछुए की चिप्स को निकालने वाले कछुए तस्करो को पकडने के लिए वन अमले की टीमो को सक्रिय कर दिया गया है ।

 

डा. चौहान बताते हैं कि 1979 में सरकार ने कछुओं सहित दूसरे जलचरों को को बचाने के लिए चम्बल से लगे 425 किमी में फैले तटीय क्षेत्र को राष्ट्रीय चंबल सेंचूरी घोषित कर दिया था । बावजूद इसके 1980 से अब तक 85 हजार कछुए बरामद किए जा चुके हैं । 100 तस्कर पकड़े गए हैं । 24 तस्कर तो पिछले तीन साल में ही पकड़े जा चुके हैं । इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब इतने पकड़े गए हैं तो कितने हजार कछुओं की तस्करी हो चुकी होगी ।
अब से काफी पहले जिंदा कछुओं की तस्करी चंबल इलाके से पश्चिम बंगाल के लिए की जाती थी। यदाकदा पश्चिम बंगाल से आए हुए तस्करो की यहां पर गिरफ्तारी होती थी लेकिन स्थानीय कछुआ तस्करों की गिरफ्तारी बड़े पैमाने पर होती रही है ।

 

इटावा के एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी का कहना है कि कछुओ को काट कर उनकी चिप्स बना कर तस्करी करने के मामले मे यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स के एएसपी अरविंद चतुर्वेदी की अगुवाई मे प्रदेश भर मे सधन अभियान चलाया जा रहा है इस अभियान मे खासी कामयाबी मिलने के साथ साथ कछुओ की तस्करी के बारे मे कई अहम जानकारियॉ सामने आती हुई दिख रही है। निश्चित है कि एसटीएफ की कार्यवाही विलुप्त प्रजाति के कछुओ का जीवन सरक्षिंत करने की दिशा मे महत्वपूर्ण कदम होगा ।

 

वैसे सबसे पहले कछुओं की चिप्स बनाए जाने का मामला साल 2000 में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में सामने आया था लेकिन तब इस बात का अंदाजा नहीं था कि कछुआ की तस्करी के बजाय उनकी चिप्स भी बना कर के इस ढंग से बाजार में उतारी जा सकती है लेकिन अब जिंदा कछुआ के बजाय कछुओं की चिप्स का कारोबार बड़े पैमाने पर चल निकला है,जो हिंदुस्तान के रास्ते होते हुए थाईलैंड,मलेशिया और सिंगापुर आदि देशों तक जा पहुंचा है ।
साल 2000 के बाद कछुओ की 32 किलो चिप्स को पकडे जाने के मामला 2006 मे इटावा के ही जसंवतनगर मे सामने आया जहॉ पर एक बंगाली समेत छह कछुआ तस्करो को गिरफतार किया गया। इनके पास बडे पैमाने पर कछुओं की चिप्स के अलावा जिंदा कछुए पकडे गये।

 

जहां चंबल इलाके में मात्र 5000 रूपये प्रति किलोग्राम से बिकने वाली कछुए के चिप्स हिंदुस्तान के बाहर पहुंचते ही 20 लाख रूपये मूल्य तक की हो जाती है इसी लालच के चलते कछुओं का बड़े पैमाने पर शिकार किया जाना शिकारियों ने बेहतर और मुफीद मान लिया है ।

 

गौरतलब है कि 31 मार्च को कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर कछुओं के अंतरराष्ट्रीय तस्कर सलीम शेख को 27 किलो खालें व कछुओं के सूखे हुए अंग बरामद कर पकडा गया । इसकी गिरफतारी के बाद एकाएक कछुओ की चिप्स बनाने वालो पर निगाह तेज हो गई ।

 

तीन अप्रैल को ही कानपुर के घाटमपुर मे जहानाबाद रोड पर एक ट्रक से 103 किलोग्राम कछुओं की चिप्स बरामद की गई। इस सिलसिले मे दो लोगो को गिरफतार किया गया। एक किलोग्राम चिप्स के लिए औसतन 50 से 70 कछुओं को मारा जाता है। गिरफ्तार कछुआ तस्कर तिलक राज ने बताया है कि वह चिप्स को बकेवर, इटावा से मालदा, पश्चिम बंगाल लेकर जा रहा था।

 

चार अप्रैल को इटावा जक्शंन रेलवे स्टेशन पर छापा मार एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने छापा मार कर कछुओ की 26 किलो चिप्स बरामद कर एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया। औरैया के एक किसान से खरीद कर लाई गई कछुए की कैलपी के साथ तस्कर जोशीईददीन को इटावा रेलवे स्टेशन से उस समय पकडा गया जब रात नौ बजे के करीब इसको माल्दा पश्चिम बंगाल पूर्वा एक्सप्रेस से ले जाने की फिराक मे था। उसी समय एसटीएफ और वन विभाग की सयुंक्त टीम ने छापेमारी करके 26 किलो चिप्स और 35500 रूपये के अलावा दो मोबाइल बरामद किये गये ।

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