18 August, 2018

जल्दी संसद पहुंचने को मायावती के सामने सीमित विकल्प, फूलपुर सीट ज्यादा आसान

खनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती यदि फिर से संसद पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी दखलंदाजी बढ़ाना चाहती हैं तो इस समय उनके सामने सीमित विकल्प ही बचे हैं। प्रदेश की दो लोकसभा सीटों के लिए होने वाले उप चुनाव में वह भाग्य आजमा सकती हैं, अथवा तीन माह बाद राज्य सभा के लिए खाली हो रही सीटों पर भी वह चुनाव लड़ सकती हैं। 

हालांकि, मायावती ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने सभी विकल्पों को खुला रखा है। सूत्रों की माने तो इलाहाबाद जिले की फूलपुर लोक सभा सीट से उप चुनाव लड़ना वह अपने लिए सबसे बेहतर विकल्प मान रही हैं। वर्ष 2014 में फूलपुर संसदीय सीट से भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य चुनाव जीते थे, लेकिन उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने वहां से इस्तीफा दे दिया है। केशव अब विधान परिषद के सदस्य चुन लिये गये हैं।
फूलपुर के अलावा गोरखपुर लोक सभा सीट पर भी उप चुनाव होना है। दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई है। योगी भी इस समय विधान परिषद के सदस्य हो चुके हैं। गोरखपुर से उप चुनाव लड़ना मायावती के लिए उतना आसान नहीं होगा क्योंकि भाजपा यहां बहुत ही मतबूत है। इस सीट पर वर्ष 1991 से लगातार भाजपा का कब्जा है।
दूसरी तरफ मायावती यदि फूलपुर से उप चुनाव में उतरती हैं तो उन्हें भाजपा विरोधी दलों खासकर सपा का भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रुप से समर्थन मिल सकता है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस समय ईवीएम के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं। वह निर्वाचन आयोग से ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से दोनों उप चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए विपक्षी दलों को एक जुट करने में भी वह प्रयासरत हैं। ऐसे में अखिलेश की मुहिम को समर्थन देकर मायावती सपा के नजदीक होकर इसका फायदा फूलपुर के उप चुनाव में उठा सकती हैं। गौरतलब है कि बसपा ने फूलपुर की सीट 2009 के चुनाव में जीती थी लेकिन 2014 में मोदी लहर के चलते इस सीट पर भाजपा ने पहली बार अपना परचम लहराया। ऐसे में विपक्षी दलों के समर्थन से मायावती इस सीट पर पुनः कब्जा जमा सकती हैं।  हालांकि, वर्ष 1995 की एक बड़ी घटना के बाद सपा और बसपा एक दूसरे को बढ़ते नहीं देखना चाहते, लेकिन राजनीति में कोई भी सदैव के लिए दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। दरअसल 1995 में मायावती ने सपा सरकार से समर्थन वापस लेकर मुलायम सिंह यादव की सरकार गिरा दी थी। इस दौरान लखनऊ स्थित गेस्ट हाउस में उन पर हमला भी हुआ था। तभी से सपा और बसपा में छत्तीस का आंकड़ा है।  संसद में पहुंचने के लिए मायावती के सामने अगला विकल्प राज्य सभा है, जहां से उन्होंने यह आरोप लगाते हुए पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया था कि उन्हें दलित मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जा रहा है। हालांकि, इस समय राज्य सभा के लिए उनका चुना जाना उतना आसान नहीं है, क्योंकि प्रदेश की विधानसभा में उनके दल के केवल 19 विधायक ही हैं, जो राज्य सभा सदस्य के चुनाव हेतु संख्या बल में काफी कम हैं। ऐसे में फूलपुर का उप चुनाव ही उनके लिए संसद पहुंचने का सही और आसान विकल्प दिखाई दे रहा है। 

grish1985@gmail.com

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