19 October, 2018

निजीकरण के नाम पर UPPCL में बड़ा घोटाला करने की तैयारी : शैलेन्द्र दुबे

लखनऊ। विद्युत् कर्मचारी सँयुक्त संघर्ष समिति ने पुनः चेतावनी दी है कि सात जनपदों की बिजली आपूर्ति के निजीकरण के टेण्डर वापस न लिए गए तो प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी और  अभियन्ता प्रान्तव्यापी आन्दोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होंगे। समिति के पदाधिकारियों की पॉवर कार्पोरेशन के निदेशक कार्मिक से वार्ता का कोई परिणाम नहीं निकला किन्तु उन्होंने यह आश्वासन दिया कि इस सम्बन्ध में संघर्ष समिति से पॉवर कार्पोरेशन के चेयरमैन आलोक कुमार शीघ्र ही विस्तृत वार्ता करेंगे।
uttar pradesh electricity, two corer, house, divyasandeshसमिति के पदाधिकारियों की आज यहाँ हुई बैठक में शैलेन्द्र दुबे ,राजीव सिंह , गिरीश पाण्डेय , सदरुद्दीन राना , बिपिन प्रकाश वर्मा ,सुहेल आबिद ,राजेंद्र घिल्डियाल ,परशुराम ,पी एन राय ,महेंद्र राय ,करतार प्रसाद ,के एस रावत ,डी सी शर्मा ,मो इलियास ,पूसे लाल ,ए के श्रीवास्तव ,भगवान् मिश्र ,पी एस बाजपेई मुख्यतया सम्मिलित हुए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि 17 फरवरी तक निजीकरण के टेंडर वापस न लिए गए तो आंदोलन के कार्यक्रमों की घोषणा कर दी जाएगी।
समिति ने कहा कि ग्रेटर नॉएडा और आगरा में निजीकरण के प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुए हैं ऐसे में सात और जनपदों का निजीकरण करने के बजाय पहले नॉएडा और आगरा के निजीकरण की समीक्षा की जानी चाहिए और जल्दबाजी में जारी किये गए टेंडर रद्द किये जाने चाहिए। संघर्ष समिति ने एक बार फिर कहा है कि सहारनपुर , कन्नौज , इटावा , उरई , रायबरेली , मऊ और बलिया की बिजली आपूर्ति की पूरी जिम्मेदारी संघर्ष समिति को दे दी जाये तो समिति एक साल में 15 % तक लाइन हानियाँ लाने  में सक्षम है किन्तु यदि सुधार के बजाये निजीकरण ही लक्ष्य है तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
 
समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने हेतु शक्ति भवन में बड़े पैमाने पर कन्सल्टैंट नियुक्त किये गए हैं। चर्चा यह है कि इन कन्सल्टैंट्स के तार बिजली आपूर्ति करने वाली निजी कंपनियों से पहले से ही जुड़े हुए हैं और टेंडर की प्रक्रिया मात्र औपचारिकता है। शक्ति भवन में बिजली के अत्यंत अनुभवी विशेषज्ञों के होते हुए कन्सल्टैंट रखे जाने का घोटाले के अलावा और कोई औचित्य नहीं है। समिति कन्सल्टैंट हटाओ अभियान भी चलाएगी।
शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने  विद्युत् वितरण के सात जिलों उरई ,इटावा, कन्नौज, रायबरेली ,सहारनपुर , बलिया और मऊ के लिए एकीकृत सेवा प्रदाता ( इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर)  के टेण्डर जारी कर दिए हैं जिसके अनुसार मार्च 2018 तक इन जिलों की बिजली व्यवस्था निजी कंपनियों को सौंप दी जाएगी ।
शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि इन जिलों की बिजली व्यवस्था इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर को दे देने के बाद  इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर के नाम की निजी कंपनी इन जिलों में बिजली कनेक्शन देने , मीटर लगाने , बिजली बिल देने, बिजली राजस्व वसूलने और यहाँ तक की बिजली बिलों में संशोधन करने का पूरा कार्य करेगी। रोचक बात यह है कि निजी कंपनी को इन सब कार्यों को करने हेतु सहूलियत देने के लिए बिजली नेटवर्क और सब स्टेशन का मेंटेनेंस करने का कार्य पावर कार्पोरेशन करेगा। जिसका सीधा अर्थ है कि अनुरक्षण का खर्च पावर कार्पोरेशन उठाएगा और इस नेटवर्क के सहारे पैसा कमाने का काम निजी कम्पनियाँ करेंगी।

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