20 January, 2018

शराब सिंडिकेट की कमर तोड़ेगी योगी सरकार

Yogi Government, wine syndicate, Uttar Pradesh, Excise Department
  • नयी आबकारी नीति से बेरोजगार होंगे छोटे शराब व्यवसायी
  • नयी आबकारी नीति में राजस्व को बढ़ाने पर होगा फोकस : आबकारी मंत्री 
  • लाटरी ड्रा से होगी दुकान आवंटित शराब सिंडिकेट होंगे हावी

लखनऊ। योगी सरकार शराब धंधे को आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 में बदलने की तैयारी करने जा रही है। नई आबकारी नीति कुछ ऐसी बनाई जा रही है जिससे वर्षों से शराब के व्यवसाय में काबिज शराब कारोबारी दुबारा नवीनीकरण कराकर अपने धंधे को कायम रखे रहे। अगले वित्तीय वर्ष के लिए जो ड्राफ्ट बनाया जा रहा है,उसकी सुगबुगाहट ने छोटे शराब कारोबारियों की नींद उड़ा दी है।

आबकारी विभाग के सूत्रों अनुसार प्रदेश में अब देसी व अंग्रेजी शराब और बीयर व भांग की दुकानों के लाइसेंस का इस साल होने वाला नवीनीकरण नहीं होगा। इस बार फरवरी-मार्च में अंग्रेजी और बीयर की दुकानों का एक साथ तथा देसी शराब का अलग से लाटरी ड्रा करवाया जाएगा। जिस भी कारोबारी के नाम ड्रा खुलेगा उसे दुकान आवंटित कर दिया जाएगा। यही नहीं शराब व बीयर की थोक आपूर्ति के लिए बड़ी शराब निर्मात्री कंपनियां प्रदेश में डिपो भी खोलेंगी। इस नई नीति के जरिये आबकारी मद से अगले वित्तीय वर्ष में भारी राजस्व जुटाने का लक्ष्य है।

नई आबकारी नीति से सरकार की नियत पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष में रहते बीजेपी ने एक शराब कारोबारी की कम्पनी को स्कूलों में पंजीरी बांटने का ठेका दिये जाने पर काफी हो-हल्ला मचाया था, लेकिन इस सरकार ने भी पंजीरी का ठेका इसी शराब कारोबारी की कंपनी को देने में संकोच नहीं दिखाया। पिछली सरकार ने विशेष जोन बनाकर एक शराब कम्पनी को फायदा पहुंचाया था तो इस सरकार में भी 5 से 7 दुकानों की सामूहिक लॉटरी निकालने की र्चचा जोरो पर है। अगर ऐसा हुआ तो निश्चित ही छोटे शराब कारोबारी जो किसी तरह से एक दुकान लेकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं,वह किनारे होकर बेरोजगार हो जाएंगे।

छोटे कारोबारियों की चिंता की बजाय आबकारी विभाग की नजर आवेदकों से शुल्क के रूप में होने वाली मोटी कमाई पर लगी है। सामूहिक दुकानों की लॉटरी निकलेगी तो उससे तमाम आवेदकों में से किसी एक के हाथ दुकान आयेगी, बाकी का आवेदन शुल्क आबकारी विभाग के खाते में चला जाएगा। उधर, प्रस्तावित आबकारी नीति की सुगबुगाहट को लेकर विवाद भी शुरू हो गए हैं। पिछले दिनों लखनऊ शराब एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमण्डल लखनऊ से सांसद और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिला था। इससे पूर्व फुटकर शराब कारोबारी आबकारी मंत्री से भी मिले थे,लेकिन इनको अभी तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है।

बताते चले कि राजनाथ सिंह मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में यूपी से शराब कारोबारियों के सिंडिकेट को तोड़ने का कार्य किया गया था। उस समय सरकार की मंशा थी कि सिंडिकेट तोड़ने से आबकारी राजस्व में बढ़ोत्तरी होने के साथ ही अलग-अलग दुकान आवंटन होने से कुछ हद तक छोटे व्यापारी भी अपना जीविकोपार्जन कर लेंगे। शराब सिंडिकेट ने उस समय भी शराब की दुकानों को हथियाने के लिएकोई कोर कसर नहीं छोड़ी। यह लोग एक-एक दुकान पर अपने लोगों के अमुक नामों से आवेदन डालकर दुकान हथियाने का कार्य किये।

आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह का कहना है कि नयी आबकारी नीति बनायी गयी थी लेकिन उसमें कुछ संशोधन किया जा रहा है। बहुत जल्द ही जारी कर दी जायेगी। उनका यह भी मानना है कि आबकारी राजस्व को बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। अब प्रस्तावित आबकारी नीति से किसको कितना फायदा होगा,यह तो समय ही बताएगा,लेकिन जो तस्वीर उभर कर आ रही है,उससे यही लगता है कि एक बार फिर यूपी के शराब कारोबारी जो लगातार अपनी दुकानों का नवीनीकरण कराकर कुण्डली मार के बैठे थे उनकी दुकान इस बार नवीनीकरण नहीं होने पाएगी। अब नये सिरे से देशी,अंग्रेजी शराब और बीयर व भांग की दुकान का ड्रा किये जाने की संभावना है।

rgautamlko@gmail.com

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