19 November, 2018

झूठे हलफनामों पर सरकार की टेढ़ी नजर

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एम.एम. सरोज

लखनऊ। नियमों को ताक पर रखकर और झूठे शपथ पत्रों के सहारे राज्य सम्पत्ति विभाग से सरकारी आवास हासिल करने वाले सरकारी और गैरसरकारी महानुभावों की मुसीबत बढऩे वाली है। राज्य सम्पत्ति विभाग ने नियमों को ताक पर रखने वाले अफसरों और पत्रकारों पर निगाहें टेढ़ी कर दी है। इस वजह से जल्द ही लगभग डेढ़ सौ सरकारी आवास खाली होने की संभावना है।
राज्य सम्पत्ति विभाग से जनसूचना अधिनियम के तहत प्राप्त सूचनाओं के आधार पर 282 पत्रकारों को सरकारी आवास की सुविधा प्राप्त है। लगभग 97 पत्रकारों ने अवैध रूप सरकारी आवासों पर कब्जा कर रखा है। सूचना अधिनियम के तहत लगभग 60 पत्रकारों और 10 आईएएस अफसरों ने हलफनामा दिया है कि उनके पास राजधानी में न तो उनके नाम और न ही उनकी पत्नी के नाम निजी आवास है। अधिकतर हलफनामों की छायाप्रति निष्पक्ष दिव्य संदेश के पास है।
राज्य सम्पत्ति नियत्रंणाधीन आवास आवंटन नियमावली 2016 नियमावली की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अधिनियम की धारा दो में स्पष्टï प्रावधान है कि विधान सभा और विधान परिषद के सदस्यों को छोड़कर सभी आवेदकों को इस बात का शपथ पत्र देना होगा कि राज्य सरकार से भवन निर्माण के लिए लोन या फिर बैंक से लोन अथवा आवास विकास तथा लखनऊ विकास प्राधिकरण से कोई भवन या भूखण्ड का आवंटन नहीं किया गया हो। इसके साथ ही स्वंय या परिवार के नाम से कोई भवन तो नहीं है। राज्य सम्पत्ति विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह शपथ पत्र अधिकतर दिग्गज पत्रकारों के लिए गले की हड्डïी बन गया है। कुछ चालाक पत्रकारों ने शपथ पत्र नहीं दिया है। 139 पत्रकारों ने इस आशय का शपथ पत्र दिया। राज्य सम्पत्ति विभाग पत्रकारों के शपथ पत्रों की जांच कर रहा है, कि उनके द्वारा दी गई सूचनाएं गलत तो नहीं हैं। गलत सूचना होने पर राज्य सम्पत्ति विभाग अधिनियम की धारा 20-(1) के तहत आवास आवंटन निरस्त किए जाने के साथ ही सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाने देश और समाज को नैतिकता और नियम-कानून का पाठ पढ़ाने वाले नामचीन पत्रकारों का चाल, चेहरा और चरित्र काफी बेरंगा है।
निजी और सब्सिडी आवास होने के बावजूद सरकारी आवासों में मौज मार रहे दिग्गज पत्रकारों की पोल जनसूचना अधिनियम ने खोल दी है। राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा आरटीआई में दी गई सूचनाओं के मुताबिक अधिकतर पत्रकार अवैध रूप से सरकारी आवासों में रह रहे हैं। राज्य सम्पत्ति विभाग की सख्ती के बाद काफी संख्या में अफसर और पत्रकार मकान खाली करने की तैयारी में हैं। राज्य सम्पत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्ला ने कहा कि जिन सरकारी और गैर सरकारी लोगों की जानकारी असत्य पायी जा रही है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जारी है।

 

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