21 October, 2018

‘अपनों’ के निशाने पर योगी 

शिशुपाल सिंह
लखनऊ। उपचुनावों में भाजपा की करारी हार के बाद से अपनों के प्रहार तेज हो गए हैं। खुली और दबी जुबान से मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लगातार हार के बाद मिशन 2019 के फिसलते लक्ष्य को देखते हुए भाजपा में संगठन के स्तर पर जल्द सर्जिकल स्ट्राइक हो सकती है। पार्टी के विधायक व मंत्री, अफसरों के भ्रष्टाचार को हार की वजह बता रहे हैं तो सांसद ने रणनीति पर ही सवाल उठा दिए हैं।
उपचुनावों में लगातार हार के बाद पार्टी के अंदर असंतोष के सुर तेज हो रहे हैं। इसके अलावा रणनीतिकारों की क्षमताओं की ब्रैंडिंग की असली तस्वीर भी सामने आने लगी है। पार्टी के अंदर खींचतान साफ  दिख रही है। विधानसभा चुनाव के बाद से ही यूपी प्रभारी ओम प्रकाश माथुर ने कानपुर में हुई कार्यसमिति के बाद से प्रदेश का रुख नहीं किया है। जबकि इस बीच कई अहम घटनाक्रम हुए हैं। इसके पीछे पार्टी के ताकतवर पदाधिकारी से उनकी नाराजगी बताई जा रही है। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से खुद को कार्यमुक्त करने का भी आग्रह किया है। आम चुनाव में उतरने से पहले संघ और पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व इस समस्या से निजात पा लेना चाहता है। इसलिए प्रदेश और क्षेत्र के स्तर पर अहम पदों पर कुछ चेहरे बदलने पर विचार चल रहा है। इसी महीने संघ के साथ भाजपा नेतृत्व की अहम बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके बाद इस पर फैसला हो सकता है। संघ से आए कुछ चेहरों की भी भूमिका बदल सकती है। इसमें क्षेत्रीय स्तर पर भी बदलाव शामिल हैं।
बिजनौर के सांसद भारतेंदु सिंह ने कहा है कि चुनाव में कुछ लोग ऐसे भी लगाए जाने चाहिए थे, जिनको जीतने का भी अनुभव हो। भूपेंद्र सिंह तीन बार चुनाव हारे। क्षेत्रीय अध्यक्ष थे, उन्हें पंचायती राज मंत्री बना दिया गया। संजीव बालियान हरियाणा में वेटनरी डॉक्टर थे,  2014 में आए, टिकट मिल गया। सांसद फिर मंत्री बन गए और अब प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। कांता कर्दम राज्यसभा सांसद बनाई गईं। साफ  है कि इन नेताओं से जो लाभ पार्टी को मिलना चाहिए था, नहीं मिला। बालियान ने पलटवार करते हुए कहा कि भारतेंदु पड़ोस के सांसद हैं। अच्छा होता चुनाव में समय देते। वे राजा हैं उन्हें घर-घर घूमकर वोट मांगना अच्छा नहीं लगता होगा। मैं किसान परिवार से हूंए पार्टी का कार्यकर्ता हूं, इसलिए लगा। मैं स्टार प्रचारक नहीं था।
कैराना-नूरपुर के नतीजों के बाद शुक्रवार को इटावा में अपनी पहली सार्वजनिक सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ सारी पार्टियां एक हो गई हैं। सिर से पांव तक भ्रष्टाचार में डूबी कांग्रेस भ्रष्टाचार की बात उठाती है तो हंसी आती है। सपा-बसपा ने जातिवाद का नंगा नाच किया। विकास का कोई तोड़ नहीं हो सकता। भाजपा का मुद्दा पहले भी विकास था और आगे भी रहेगा।
बैरिया से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के आधे मंत्रियों के कामकाज का तरीका अच्छा नहीं है। वे पार्टी कार्यकर्ताओं की बातों को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। सरकार में अगर ऐसे मंत्री अपने पद पर बने रहे तो भाजपा दिनों-दिन गर्त में जाएगी। थाना, तहसील और ब्लॉक के स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं होने के कारण चुनाव में हार हुई है। हरदोई के गोपामऊ से विधायक श्याम प्रकाश ने तो पूरी कविता ही लिख डाली है, मोदी नाम से पा गए राज, कर न सके जनता मन काज। संघ, संगठन हाथ लगाम, मुख्यमंत्री भी असहाय। जनता और विधायक त्रस्त, अधिकारी, अध्यक्ष भी भ्रष्ट।
भाजपा के एक अनुभवी नेता कहते हैं कि स्थानीय स्तर पर चुनावी प्रबंधन में सबसे बड़ा खतरा प्रभारी संस्कृति से पैदा हो गया है। इधर चुनावों में जमीन की समझ रखने वाले स्थानीय नेता की जगह पैराशूट से प्रभारी उतारने का चलन

बढ़ गया है। जब-जब लहर चली तब तो ये चाणक्य हो गए, हालात प्रतिकूल हुए तो कलई खुल गई। गोरखपुर, फूलपुर से लेकर कैराना-नूरपुर तक तक तस्वीर कुछ ऐसी ही रही। जिन्होंने कभी न खुद चुनाव लड़ा और न जनाधार है, वे स्थानीय संगठन पर थोप दिए गए। पैराशूट प्रभारी कभी एसी कमरों में बैठकर तो कभी बड़े नेताओं के मंच पर नमूदार होकर हाथ हिलाने वाली फोटो सोशल मीडिया पर डालते रहे। कार्यकर्ताओं से किसी ने पूछने की जहमत नहीं उठाई कि क्या किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का चेहरा जरूर उभरा है, लेकिन मंत्री, विधायकों की काम-काज पर टिप्पणियां बहुत बार असहज स्थिति पैदा कर देती हैं। कैराना-नूरपुर की हार के बाद बिजनौर के भाजपा सांसद भारतेंदु सिंह ने अनुभवहीन नेताओं को दी गई कमान पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश संगठन में अहम पदों से लेकर मोर्चों तक में कुछ गिने-चुने नामों को छोड़कर अनुभवहीन और जनाधारविहीन लोग ही बैठे हैं। राज्यसभा से लेकर विधान परिषद तक में जातीय समीकरण साधने के नाम पर किए गए समायोजन भी ऐसे नहीं है, जो कार्यकर्ताओं में उत्साह भर सकें। ऐसे चेहरों की पूरी ऊर्जा खुद को बचाने और आकाओं को मनाने में ही जा रही है।

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