11 December, 2018

पैसे कमाने की होड़ और फास्टफूड के बढ़ते कल्चर से ब्लड प्रेशर, शुगर, तनाव, अवसाद और पेट संबंधी रोगों की चपेट में युवा

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नई दिल्ली। मौजूदा दौर में बढ़ते शहरीकरण और लोगों की पैसा कमाने की भूख के चलते सेहत कहीं पीछे छूट जाती है। जिस का परिणाम देर सवेर लोगों को विभिन्न रोगों में जकड़ जाने से चुकाना पड़ता है। यह बात सही है कि अच्छे जीवनयापन के लिए जहां पैसा आवश्यक है वहीं इसकी पूर्ति तभी होगी जब सेहत ठीक रहेगी। अगर सेहत को नजरअंदाज कर पैसे के पीछे दौड़ा जाएगा तो उसके परिणाम प्रतिकूल होंगे। दूसरे प्राय: देखा गया है कि आज की युवा पीढ़ी को घर के खाने को दरकिनार कर बाजार के खाने को तरजीह देती है, उसमें भी फास्टफूड को। तर्क वही होता है कि समय ही नहीं है। कुल मिलाकर जबान पैसा कमाने की होड़ और जबान के चटखारे के लिए युवा पीढ़ी में विभिन्न प्रकार के रोगों में जकड़ती जा रही है। इनमें ब्लड प्रेशर, शुगर, तनाव, अवसाद और पेट संबंधी जैसी बीमारियों शामिल हैं।

Youth, blood pressure, sugar, stress, depression, stomach, diseases,fast food culture कई बार ये बीमारियां जान लेवा तक साबित हो जाती हैं। हाईपट्रेंशन, खानपान पर ध्यान न दिये जाने की वजह से कोलेस्ट्राल और सबसे ज्यादा मधुमेह ऐसे रोग हैं जिनके रोगियों की संख्या में दिनों दिन वृद्धि हो रही है। हाईपट्रेंशन और इसकी वजह पैदा होने वाला मधुमेह ऐसा रोग है जिसकी वजह से अन्य कई बीमारियां भी पैदा होती हैं। इसके इलाज के लिए यूं तो एलोपैथ में जहां अनेक गोलियां और इंजेक्शन विकसित किये गए हैं, वहीं आयुव्रेद, होम्योपैथि पद्धति की तरफ भी पीड़ित चिकित्सक और पीड़ित आकर्षित हो रहे हैं। आयुव्रेद और यूनानी और होम्योपैथ में उक्त रोगों के इलाज के लिए दवाएं खोजने के लिए काफी अनुसंधान हो रहे हैं और इनसे काफी लाभ भी हो रहा है और वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद दवाएं खोजने में सफल हो रहे हैं।

अनियमित जीवन सोने-जागने को कोई समय निर्धारित न होना, खान पान में केजुअल होना, अधिक स्पाइसी भोजन और मीट, चाट पकौड़े आदि के ज्यादा सेवन से ब्लड प्रेशर, पेट रोगों और शुगर जैसी बीमारियों का जन्म होता है। इसके अलावा आयुव्रेद में भी ऐसी देशी दवाएं हैं जिनसे इस पर काबू पाने में मदद मिलती है। लंबे अर्से तक चले वैज्ञानिक परीक्षणों और शोधों के बाद वैज्ञानिक औद्योगिक अनुसंधान परिषद ऐसी दवा खोज ली है जिससे सफलतापूर्वक शुगर रोगियों का इलाज हो रहा है। बहुत से एलोपैथिक डाक्टर भी शुगर के रोगियों को सीएसआईआर की एमिल फार्मास्युटिकल द्वारा तैयार बीजीआर-34 नामक इस दवा को प्रसक्राइब कर रहे हैं।

यह दवा सीएसआईआर के लखनऊ स्थित शोध संस्थान नेशनल बॉटनीकल रिसर्च इंस्टीटयूट और सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिसिन एंड एयरोमेटिक प्लांट्स ने पांच साल के अनुसंधान के बाद ईजाद की गई। इस दवा को प्रसक्राइब करने वाले कई डाक्टरों का कहना है कि शुगर रोगियों पर यह दवा काफी अच्छा प्रभाव छोड़ रही है। जो मरीज इस दवा का सेवन रेगुलर कर रहे हैं उन्हें शुगर कंट्रोल रखने में काफी मदद मिल रही है। यदि मरीज तीन से चार माह लगातार इस दवा का उपयोग कर लें तो मुमकिन है एलोपैथिक दवा का भी सहारा न लेना पड़े। इन्सुलिन जैसी महंगी दवा और इंजेक्शन से भी छुटकारा मिल सकता है।

हरी सब्जियों का सेवन भी बहुत सी बीमारियों को दूर रखने में मददगार है। फूलगोभी, बंदगोभी, पालक, ब्रोकली, गाजर, पत्तेदार सब्जियां जैसे मेथी, बथुआ, सरसों का साग भी लाभकारी है। आप जितना ज्यादा ये सब्जियां खाएंगे उतना ही फायदा होगा। इनको खाने से आपकी क्रेविंग भी कम होगी और वजन भी नहीं बढ़ेगा। आप इनका उपयोग सूप और सलाद के रूप में भी कर सकते हैं। ऐसा करने से मधुमेह, हाईपरटेंशन और कोलेस्ट्रोल कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

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